भारत की विदेश नीति को अब ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर केंद्रित किया जा रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत वैश्विक स्तर पर साझेदारियों को बढ़ावा दे रहा है, जो राष्ट्रीय हितों से जुड़ी हैं। दिल्ली में आयोजित रायसीना डॉयलॉग में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत की यह नीति एक विशेष गुट के साथ संरेखण नहीं, बल्कि स्वतंत्रता पर आधारित है। मौजूदा वैश्विक संघर्षों के संदर्भ में, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक निर्णय भी इस नीति का हिस्सा हैं।
भारत-EU FTA: एक ऐतिहासिक कदम
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस वर्ष की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। इस समझौते से लगभग 25 प्रतिशत वैश्विक GDP वाले बाजार का समावेश होता है। इसके परिणामस्वरूप, भारत के निर्यात का 99 प्रतिशत हिस्से को प्राथमिकता मिलने का रास्ता साफ होता है। यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूती प्रदान करेगा।
AI पर नई दिल्ली में घोषणा
India AI Impact Summit 2026 में 90 से अधिक देशों ने New Delhi Declaration पर हस्ताक्षर किए। भारत ने AI Risk से AI Impact की चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक का प्रयोग समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक हो, ना कि केवल लाभ के लिए।
भारत करेगा BRICS की अगुवाई 2026 में
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता करेगा, जिसमें चार मुख्य स्तंभ होंगे: लचीलापन, नवाचार, सहयोग, और स्थिरता। रायसीना डॉयलॉग में ‘संस्कृति’ को एक प्रमुख विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसके माध्यम से भारत अपनी संस्कृति और आधुनिकता को जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
भारत की विदेश नीति का नया मोड़
अब भारत केवल वैश्विक व्यवस्था में समायोजन करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह इसे सुधारने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। G20 की अध्यक्षता इसका जीता जागता उदाहरण है, जिसका सिद्धांत ‘Vasudhaiva Kutumbakam’ है। यह एक पृथ्वी, एक परिवार, और एक भविष्य का संदेश देता है। भारत की विदेश नीति के तीन मुख्य स्तंभ हैं: राष्ट्रीय हितों की रक्षा, समायोजन, और प्रगति।
आंतरिक और बाह्य नीति में संतुलन
भारत ने SHANTI Act 2025 के माध्यम से परमाणु ऊर्जा में विदेशी निवेश आकर्षित करने का नया ढांचा पेश किया है। यह स्वच्छ ऊर्जा विस्तार का लक्ष्य रखता है। भारत ने मानव-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करते हुए G20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य के रूप में जोड़ा, जो वैश्विक शासन में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाता है।
अमेरिकी उपविदेश मंत्री का संकल्प
अमेरिकी उपविदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा कि अमेरिका भारत से अपने व्यापारिक संबंध बढ़ाना चाहता है, लेकिन वह चीन के साथ अतीत की गलतियों को दोहराने से बचेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 21वीं सदी में भारत का उदय आवश्यक है, जहाँ अमेरिका भारत के साथ साझेदारी को दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा मानता है।
एक नई वैश्विक व्यवस्था की ओर
भारत का वैश्विक संदेश यह है कि भविष्य की स्थिर विश्व व्यवस्था केवल एक शक्ति या संस्कृति पर निर्भर नहीं हो सकती। सभी देशों को अपनी जगह और तरक्की के लिए एक दूसरे के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। इसलिए साझा प्रयास और साझा हित के लिए सभी को एक साथ आना होगा।
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