साइरस पूनावाला ने राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ को 67.2 करोड़ रुपये में खरीदकर भारतीय कला बाजार में इतिहास रच दिया है। यह डील आधुनिक भारतीय कला में सबसे महंगी मानी जा रही है। पहले यह रिकॉर्ड एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग के नाम था, जिसे पिछले वर्ष 18 करोड़ रुपये में बेचा गया था। साइरस पूनावाला की इस खरीद ने वर्मा के काम को एक नया ज़िंदगी दी है।
अनोखी कलाकारी का उदाहरण
रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ मातृत्व प्रेम का अनोखा उदाहरण पेश करती है। पेंटिंग में बाल कृष्ण और उनकी माँ यशोदा के प्यार को बहुत खूबसूरत तरीके से उकेरा गया है। इस पेंटिंग के निर्माण का समय 1890 के दशक का है, जब वर्मा अपनी कला के चरम पर थे। साइरस पूनावाला ने इस पेंटिंग को एक राष्ट्रीय खजाना माना है और इसे आम लोगों के देखने के लिए उपलब्ध कराने की बात की है।
राजा रवि वर्मा की विरासत
राजा रवि वर्मा का जन्म 1848 में त्रावणकोर रियासत में हुआ था। वह यूरोपीय तकनीक और भारतीय संवेदना के मेल के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने 1894 में लिथोग्राफिक प्रेस की स्थापना की थी, जिससे उनकी पेंटिंग्स की सस्ती प्रिंट्स बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो सकीं। इससे हिंदू देवी-देवताओं की पेंटिंग्स आम भारतीयों के घरों तक पहुँचने लगी।
पेंटिंग की मूल्यांकन पर नजर
‘यशोदा और कृष्ण’ की नीलामी से पहले इसकी अनुमानित कीमत 80-120 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस कीमत ने न केवल भारतीय कला के क्षेत्र में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। पेंटिंग की बिक्री ने वर्मा की कला को फिर से जीवंत किया है, जिससे नए पीढ़ी के लिए प्रेरणा मिल सके।
कला की दृष्टि में बदलाव
साइरस पूनावाला ने कहा कि इस पेंटिंग द्वारा आम लोगों को भारतीय संस्कृति और कला से जोड़ने का एक प्रयास है। उन्होंने इसे सौभाग्य और जिम्मेदारी की भावना से भरा बताया है। भारतीय कला का यह सबसे महंगा सौदा निश्चित रूप से कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व
इस खरीद ने न केवल कला की दुनिया में एक नया मापदंड स्थापित किया है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय कला बाजार में निवेश करने की भावना कितनी बढ़ी है। साइरस पूनावाला का यह कदम भारतीय कला के लिए महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। अब यह देखने लायक होगा कि इस नीलामी से भारतीय कला का भविष्य कैसे आकार लेगा।
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