International Anti-Corruption Day: देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पिछले दो वर्षों में काफी तेज हुई है। NCRB और Central Vigilance Commission (CVC) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी में 22% बढ़ोतरी देखी गई है। यानी राज्य दर राज्य Anti-Corruption Bureau (ACB) और Vigilance विभाग लगातार छापेमारी, ट्रैप ऑपरेशन और गुप्त कार्रवाई कर रहे हैं। लेकिन इस बढ़ी हुई कार्रवाई के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केस अदालत तक पहुंचते हैं, तो वे टिक क्यों नहीं पाते? डेटा बताता है कि भारत में Corruption Cases का Conviction Rate सिर्फ 34–36% के बीच अटका हुआ है। सरल भाषा में कहें तो हर तीन करप्शन मामलों में से दो केस कोर्ट में गिर जाते हैं।
Corruption के मामले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित कई बड़े राज्यों की हालत खराब
उत्तर प्रदेश लोकायुक्त की 2024–25 रिपोर्ट बताती है कि पूरे साल में 182 करप्शन के केसेस दर्ज हुए, लेकिन दोष सिद्ध सिर्फ 48 में हुआ। महाराष्ट्र ACB के आंकड़ों में 2024 में 1,420 ट्रैप केस हुए, लेकिन कन्विक्शन केवल 29% था। कर्नाटक लोकायुक्त की रिपोर्ट में Disproportionate Assets वाले मामलों में कन्विक्शन करीब 31% तक सीमित रहा। यह स्पष्ट करता है कि गिरफ्तारियां सुर्खियां बनाती हैं, पर अदालत में टिक नहीं पाती। ज्यादातर मामलों में समस्या जांच प्रक्रिया में ही शुरू हो जाती है। CVC की एक विस्तृत रिपोर्ट में यह सामने आया कि लगभग 42% मामलों में प्रक्रिया में गलतियां होती है। मतलब जांच अधिकारी का ट्रांसफर, केस डायरी में कमी, सीजर मेमो का सही फॉर्मेट में न बनना, डिजिटल एविडेंस की चेन ऑफ़ कस्टडी का टूट जाना आदि।
International Anti-Corruption Day: जनता का सिस्टम पर भरोसा कमजोर
31% मामलों में एविडेंस कोर्ट में ऐडमिसिबल नहीं होता, जबकि करीब 28% मामलों में गवाह Hostile हो जाते हैं। यही वजह है कि अदालतें Benefit of Doubt देते हुए अधिकारियों को बरी कर देती हैं। Disproportionate Assets यानी DA cases में स्थिति और खराब है। यहां Conviction rate 20–22% तक ही रहता है। संपत्ति का गलत मूल्यांकन, आय के स्रोतों का अधूरा Assessment, Digital Trail सही तरीके से एकत्र न होना और सरकारी फाइलों का गायब हो जाना ये सब कारण कोर्ट में केस को बेहद कमजोर बना देते हैं। गंभीर बात यह है कि DA cases में जांच लंबे समय चलती है, जिससे आरोपी को तकनीकी Loopholes मिल जाते हैं। एक वरिष्ठ ACB अधिकारी बताते हैं कि Corruption Case में गिरफ़्तारी आसान है, लेकिन सजा बहुत मुश्किल। भारत में Scientific Investigation की सबसे ज्यादा कमी इसी वर्ग के मामलों में दिखती है। गवाहों के पलटने का असर भी बहुत बड़ा है। ऐसे हालातों में ज़ाहिर है कि जनता का भरोसा कमजोर होता है। सरकारें हर स्तर पर Zero Tolerance, Strict Action और Clean Governance का दावा करती हैं, लेकिन जब अदालत में केस टिकते ही नहीं, तब ये दावे खोखले लगने लगते हैं।
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