हर बच्चे को मिले प्यार, सुरक्षा और अपना परिवार: कानूनी दत्तक ग्रहण के लिए CARA का राष्ट्रव्यापी अभियान
किसी भी बच्चे के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा केवल एक छत नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार होता है जहाँ उसे बिना किसी शर्त के प्यार, अपनापन, सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिले। दुर्भाग्य से देश में आज भी हजारों ऐसे बच्चे हैं जो विभिन्न परिस्थितियों के कारण माता-पिता के स्नेह से वंचित हैं। वहीं दूसरी ओर अनेक दंपति और परिवार ऐसे हैं जो किसी बच्चे को अपनाकर उसे बेहतर जीवन देना चाहते हैं। ऐसे में दोनों के बीच एक सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी सेतु का कार्य करती है केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority – CARA)। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत CARA ने MyGov के माध्यम से एक जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य संदेश है कि प्रत्येक बच्चे को एक सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और सम्मानजनक परिवार मिले तथा गोद लेने की पूरी प्रक्रिया केवल कानूनी और अधिकृत माध्यम से ही पूरी की जाए। अभियान यह भी स्पष्ट करता है कि प्रत्यक्ष (Direct) गोद लेना कानूनन अवैध है और इससे बच्चे तथा गोद लेने वाले परिवार दोनों के अधिकारों और सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
हर बच्चे का अधिकार है परिवार
संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (UNCRC) के अनुसार प्रत्येक बच्चे को परिवार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। यदि किसी कारणवश बच्चा अपने जैविक परिवार के साथ नहीं रह सकता, तो उसके सर्वोत्तम हित में उसे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से नया परिवार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। गोद लेना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि दो जिंदगियों को जोड़ने वाला भावनात्मक रिश्ता है। एक ओर बच्चा परिवार का स्नेह पाता है, वहीं दूसरी ओर परिवार को मातृत्व-पितृत्व का सुख मिलता है। यही कारण है कि सरकार इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दे रही है।
क्या है CARA?
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक वैधानिक संस्था है। यह देश में दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया का नियमन करती है तथा यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक गोद लेना भारतीय कानूनों और बच्चों के सर्वोत्तम हितों के अनुरूप हो। CARA का उद्देश्य केवल बच्चों को परिवार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा अवैध खरीद-फरोख्त, मानव तस्करी या अन्य शोषण का शिकार न बने।
क्यों अवैध है Direct Adoption?
कई बार लोग परिचितों, रिश्तेदारों या दलालों के माध्यम से सीधे बच्चे को गोद लेने का प्रयास करते हैं। सरकार स्पष्ट करती है कि इस प्रकार की Direct Adoption प्रक्रिया कानून के विरुद्ध है।ऐसे मामलों में—
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बच्चे की वास्तविक पहचान और कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती।
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मानव तस्करी और बाल शोषण का खतरा बढ़ जाता है।
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भविष्य में बच्चे के अधिकारों और उत्तराधिकार से जुड़े विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
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गोद लेने वाले परिवार को भी कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसीलिए सरकार केवल CARA द्वारा निर्धारित अधिकृत प्रक्रिया का पालन करने की सलाह देती है।
पारदर्शी और सुरक्षित प्रक्रिया
CARA की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से इच्छुक अभिभावक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन, होम स्टडी रिपोर्ट, पात्रता की जांच, बच्चे का मिलान (Matching), न्यायालय की स्वीकृति तथा उसके बाद दत्तक ग्रहण की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य है कि प्रत्येक बच्चे को ऐसा परिवार मिले जहाँ उसका सर्वांगीण विकास हो सके और उसके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहें।
समाज की भी है बड़ी जिम्मेदारी
बच्चों की देखभाल केवल सरकार का दायित्व नहीं है। समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि यदि उसे किसी परित्यक्त, अनाथ या संकटग्रस्त बच्चे की जानकारी मिले तो वह संबंधित प्रशासनिक तंत्र और अधिकृत एजेंसियों को इसकी सूचना दे। किसी भी परिस्थिति में स्वयं बच्चे को गोद देने या दिलाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि गोद लेने को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना भी अत्यंत आवश्यक है। आज आवश्यकता है कि लोग इसे दया नहीं, बल्कि समान अधिकार और सम्मान के दृष्टिकोण से देखें।
MyGov अभियान का उद्देश्य
MyGov पर चलाया जा रहा यह अभियान नागरिकों को यह संदेश देता है कि—
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हर बच्चे को परिवार का अधिकार है।
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गोद लेने की प्रक्रिया केवल कानूनी माध्यम से ही अपनाई जाए।
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अवैध और प्रत्यक्ष गोद लेने से बचें।
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जागरूक नागरिक बनकर दूसरों को भी सही जानकारी दें।
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सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक दत्तक ग्रहण को बढ़ावा दें।
यह अभियान नागरिक सहभागिता के माध्यम से एक ऐसे भारत के निर्माण का प्रयास है जहाँ कोई भी बच्चा परिवार के प्यार और सुरक्षा से वंचित न रहे।
भावनात्मक पहलू
एक अनाथ या परित्यक्त बच्चा जब पहली बार किसी परिवार को “माँ” और “पापा” कहकर पुकारता है, तब केवल उसका जीवन ही नहीं बदलता, बल्कि पूरे परिवार की दुनिया भी बदल जाती है। उसके चेहरे की मुस्कान, उसकी पहली सफलता, पहला स्कूल बैग, पहला जन्मदिन और उसके सपनों को उड़ान देने वाला परिवार, यही दत्तक ग्रहण का वास्तविक अर्थ है। हर बच्चा किसी का इंतजार कर रहा है ऐसे हाथों का जो उसे सुरक्षा दें, ऐसे कंधों का जिन पर सिर रखकर वह निश्चिंत होकर सो सके और ऐसे दिलों का जो उसे बिना किसी भेदभाव के अपना लें।
No Shortcut To Parenthood: कानूनी दत्तक ग्रहण से संवरें हजारों बच्चों का भवि
भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस विकास की असली पहचान तभी होगी जब देश का कोई भी बच्चा प्यार, सुरक्षा और सम्मान से वंचित न रहे। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) और MyGov का यह अभियान केवल गोद लेने की प्रक्रिया का प्रचार नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश है। यदि समाज का प्रत्येक सक्षम परिवार कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हुए आगे आए, तो हजारों बच्चों का भविष्य बदल सकता है। आइए संकल्प लें कि हर बच्चे को उसका अपना परिवार मिले, लेकिन केवल कानूनी, पारदर्शी और नैतिक प्रक्रिया के माध्यम से। यही नए भारत की संवेदनशील और जिम्मेदार पहचान होगी।
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