अमोनिया गैस: भारत में मौत का साइलेंट किलर, 10 साल में 39 की जान गई

The CSR Journal Magazine
भारत में अमोनिया गैस अब एक गंभीर खतरे के रूप में उभर कर सामने आ रही है। पिछले 10 सालों में विभिन्न राज्यों में अमोनिया लीक होने से लगभग 39 लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में तामिलनाडु के तिरुवल्लूर में एक प्राइवेट सी-फूड प्रोसेसिंग फर्म से अमोनिया गैस लीक होने की घटना में 16 लोगों की मृत्यु हुई है। यह घटनाएँ उस गंभीरता को दर्शाती हैं जिसमें अमोनिया गैस लोगों की जान के लिए खतरा बन चुकी है।

तिरुवल्लूर की घटना का विस्तार

21 जून को तिरुवल्लूर में स्थित पीटर एंड पॉल सीफूड एक्सपोर्ट्स में अमोनिया का रिसाव हुआ। इस हादसे में 16 लोगों की मृत्यु हो गई, जिनमें से अधिकांश महिलाएं थीं जो विभिन्न राज्यों से काम की तलाश में आई थीं। अस्पताल में लगभग 25 लोग उपचाराधीन हैं। यह घटना उस वक्त हुई जब कंपनी में रूटीन काम का संचालन चल रहा था।

अमोनिया गैस का इस्तेमाल और खतरे

अमोनिया का उपयोग भारत में खाद्य प्रसंस्करण, फर्टिलाइज़र और रेफ्रिजरेशन में किया जाता है। यह रसायन सामान्यतः खेती के लिए आवश्यक नाइट्रोजन प्रदान करता है। लेकिन इसकी उपलब्धता और आसानी से खरीदने की वजह से यह कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। प्रदूषण और खराब सुरक्षा मानकों के चलते ऐसे हादसे समय-समय पर होते रहते हैं।

दुर्घटनाओं का सिलसिला

पिछले 10 सालों में यूपी से लेकर गुजरात तक अमोनिया लीक की कई घटनाएँ हो चुकी हैं। 2016 में सूरत में 2, 2017 में सहारनपुर में 2 और 2018 में चेन्नई में एक व्यक्ति की मौत हुई। हर साल होने वाली इन घटनाओं में अब तक 39 लोगों की जान जा चुकी है। यह घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।

अमोनिया की बिक्री और लाइसेंसिंग

अमोनिया कोई अवैध रसायन नहीं है, जिससे इसकी उपलब्धता आसान है। इसे औद्योगिक गैस के रूप में लाइसेंस और सुरक्षा मानकों के तहत बेचा जाता है। इसका उपयोग करने के लिए पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोजिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन से मंजूरियाँ आवश्यक हैं। लेकिन, इसके मामले में सुरक्षा ऑडिट और रखरखाव की कमी के चलते घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं।

सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी

अमोनिया गैस के रिसाव की घटनाएँ मुख्यतः सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण होती हैं। पुराने पाइप, खराब वाल्व, और अत्यधिक लापरवाहियां ऐसे मुख्य कारण हैं। उद्योगों को चाहिए कि वे अपने स्टोरेज सिस्टम और सुरक्षा ऑडिट में ध्यान दें ताकि ऐसी घटनाएँ ना घटें।

कितना ख़तरा है अमोनिया गैस में?

अमोनिया की खतरा स्तर बहुत उच्च है। इसकी हीट अवशोषण क्षमता अद्वितीय है, लेकिन इसे संभालते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। इसके फायदों के बावजूद, इसके रिसाव से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे अमोनिया एक साइलेंट किलर साबित हो रहा है। यदि इसके इस्तेमाल और भंडारण के लिए उचित उपाय नहीं किए गए, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी होते

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