महाकुंभ भगदड़ के पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा, हाईकोर्ट ने 30 दिन की डेडलाइन तय की

The CSR Journal Magazine
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ 2025 में हुई भगदड़ के पीड़ितों के मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवजे के दावों पर फैसला न्यायिक जांच आयोग नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मेला अधिकारी करेंगे। मेलाधिकारी को 30 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा। इसका उद्देश्य मुआवजा प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि पीड़ितों को जल्दी न्याय मिल सके।

कोर्ट ने दी मुआवजे की प्रक्रिया को सरल बनाने की गाइडलाइन

अदालत ने न्यायिक जांच आयोग के सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे का अवलोकन करते हुए कहा कि ये दावे आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। वे केवल घटना के कारणों की जांच कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने भगदड़ की घटना को नकारा नहीं किया और कुछ पीड़ितों को पहले ही मुआवजा मिल चुका है।

प्रदत्त निर्देश और मुआवजा दावों का निपटारा

कोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजे का हर दावा सीधे डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। मेलाधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि भगदड़ के दौरान हुई मौत या संपत्ति के नुकसान का सत्यापन किया जाए। पेश किए गए डॉक्यूमेंट्स को बिना विवाद वाला माना जाएगा, जब तक कि कोई ठोस सबूत न हो।

मेलाधिकारी पर हाला चेक करने की जिम्मेदारी

मेलाधिकारी इन्हें प्राप्त दावों की पुष्टि करेंगे और जानकारी देंगे कि क्या घटनास्थल पर वास्तव में ऐसा हुआ था। मेलाधिकारी को यह भी ध्यान रखना होगा कि मुआवजे के दावों पर निर्णय करने के लिए उन्हें 30 दिनों की डेडलाइन का पालन करना है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आयोग की जांच केवल कुछ सीमित बिंदुओं पर केंद्रित होगी।

डॉक्युमेंट्स और जांच की प्रक्रिया

बेंच ने यह भी बताया कि मृतक की एक इन्क्वेस्ट रिपोर्ट और मेडिकल ऑफिसर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाएगा। इन दस्तावेजों के साथ ही पुलिस अधिकारियों की जांच रिपोर्ट भी आवश्यक होगी। यदि किसी दावे पर विवाद उठता है, तो वह केवल वैध सबूतों द्वारा ही संभव होगा। मेलाधिकारी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि वे फैसले के मामले में समय पर कार्यवाही करें।

मामले के अनुसार हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण बातें

कोर्ट ने मामले की बारिकी से सुनवाई की और पुष्टि की कि पीड़ितों के परिवारों की भलाई के लिए त्वरित निर्णय जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग द्वारा दर्ज की गई सुनवाई केवल विशेष गाइडलाइनों के संदर्भ में होगी, जो मुख्य रूप से घटना के कारणों और भविष्य के सुझावों पर केंद्रित होगी।

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