32 सेकंड में कैसे बन गई उड़ान मौत का सफर? AI171 हादसे का रहस्य अब भी बरकरार

The CSR Journal Magazine

कैसे हुआ हादसा?

एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 को एक साल हो गया है, लेकिन इसके पीछे का सच अब भी अनसुलझा है। उड़ान भरने के 32 सेकंड बाद ही दोनों इंजन अचानक बंद हो गए थे। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में पायलटों की बातचीत से मानव त्रुटि का संदेह गहराता जा रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा विशेषज्ञ बोइंग की तकनीकी नाकामी पर सवाल उठा रहे हैं। 12 जून 2025 को, अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरते समय इस विमान का क्रैश होना एक दिल दहला देने वाली घटना थी।

पायलटों की आखिरी बातचीत

हादसे के समय कॉकपिट में पायलटों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। एक पायलट ने चिल्लाकर कहा, ‘तुमने इंजन क्यों बंद किया?’ दूसरे का उत्तर था, ‘मैंने ऐसा नहीं किया।’ इस संकेतिक वार्तालाप से साफ होता है कि कोई गंभीर समस्या रही होगी। एक साल बाद भी इस मामले में कोई स्पष्टता नहीं आई है, जिससे सभी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह मानवीय गलती थी या कुछ और।

ब्लैक बॉक्स की जांच में देरी

अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, किसी भी बड़ी हवाई दुर्घटना की जांच रिपोर्ट एक साल के भीतर आनी चाहिए। लेकिन एअर इंडिया AI171 की घटना के संबंध में जांच रिपोर्ट में देरी हो रही है, जिससे यह सवाल उठता है कि इसके पीछे किस प्रकार का कॉर्पोरेट प्रेशर काम कर रहा है। क्या समिति अपनी जिम्मेदारी निभा रही है? इस मामले की पूरी क्रोनोलॉजी को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दुःखद आंकड़े

फ्लाइट 171 ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसमें 230 यात्री सवार थे। टेकऑफ के तुरंत बाद, विमान ने बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर अपनी उड़ान समाप्त कर दी। इस भीषण दुर्घटना में 260 लोगों के मारे जाने की सूचना है, जिसमें सभी यात्री और कुछ लोग ज़मीन पर उपस्थित थे। प्रारंभिक सीसीटीवी फुटेज से ये स्पष्ट हुआ कि विमान में कोई बाहरी विस्फोट नहीं हुआ था।

कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का रहस्य

जुलाई 2025 में जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने हड़कंप मचा दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि टेकऑफ के तुरंत बाद, विमान के दो इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच अचानक बंद हो गए। इससे पता चलता है कि ईंधन की सप्लाई को अचानक रोक दिया गया था। क्या यह सब कुछ मानव त्रुटि का नतीजा था या किसी तकनीकी समस्या का? सवाल उठना लाजिमी है।

पायलटों का बचाव

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने इसे पक्षपाती बताया है। उन्होंने कहा कि जब एक पायलट जीवित होता है, तो वह अपनी बेगुनाही साबित कर सकता है, लेकिन यदि वह मर जाता है, तो सभी दोष उसे ही ठहरा दिया जाता है। पायलट के परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक पायलट को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता।

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