लगातार तीन कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद 3 फरवरी को सोने-चांदी के बाजार में मजबूती देखने को मिली। MCX में चांदी करीब 7% उछलकर ₹2.53 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई, जबकि सोना भी लगभग ₹5 हजार मजबूत हुआ। हालांकि एक्सपर्ट्स मार्जिन बढ़ोतरी और कमजोर फिजिकल डिमांड को आगे के लिए जोखिम मान रहे हैं।
MCX में चांदी और सोने की तेज रिकवरी, निवेशकों को राहत
गोल्ड और सिल्वर मार्केट में तीन दिन तक चली गिरावट के बाद आज मजबूती ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है। वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में चांदी के भाव में करीब ₹17 हजार (लगभग 7%) की तेजी दर्ज की गई। इसके साथ ही एक किलो चांदी का दाम ₹2.53 लाख के स्तर पर पहुंच गया।
इससे पहले बीते तीन कारोबारी दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹1.60 लाख तक की गिरावट आई थी। कुछ समय पहले चांदी ₹4 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गई थी, लेकिन भारी मुनाफावसूली के चलते इसके भाव ₹2.40 लाख तक फिसल गए थे।
सोने की बात करें तो इसमें भी करीब ₹5 हजार (लगभग 3%) की मजबूती देखने को मिली। MCX पर 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.45 लाख के आसपास पहुंच गया है, जबकि तीन दिनों में इसमें करीब ₹26 हजार की गिरावट दर्ज की गई थी।
सर्राफा बाजार में अलग रेट, जानिए MCX और फिजिकल दामों का फर्क
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, आज सर्राफा यानी फिजिकल मार्केट में चांदी ₹2,55,372 प्रति किलो पर बिक रही है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,708 दर्ज किया गया।
MCX और सर्राफा बाजार के दाम अलग-अलग होने की बड़ी वजह दोनों बाजारों का स्वरूप है। MCX एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जहां शेयर बाजार की तरह हर सेकंड खरीद-फरोख्त होती है, जिससे कीमतें लगातार बदलती रहती हैं।
इसके उलट सर्राफा बाजार में फिजिकल सोना-चांदी की खरीद होती है, जिसमें ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, बीमा और ज्वेलर्स का मार्जिन भी जुड़ता है। इसी वजह से अक्सर फिजिकल बाजार के दाम MCX से ज्यादा दिखाई देते हैं।
गिरावट की वजहें प्रॉफिट बुकिंग और डिमांड में सुस्ती
एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने-चांदी में आई हालिया गिरावट की दो बड़ी वजहें रहीं। पहली, प्रॉफिट बुकिंग। हाल के दिनों में दोनों कीमती धातुएं रिकॉर्ड हाई स्तर पर पहुंच गई थीं। ऐसे में निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू किया, जिससे भारी बिकवाली का दबाव बना।
दूसरी वजह फिजिकल डिमांड में कमी रही। ऑल टाइम हाई कीमतों के बाद ज्वेलरी और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए मांग कमजोर पड़ गई। खासतौर पर चांदी के औद्योगिक उपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ीं, जिसका असर इसके दामों पर साफ दिखा।
मार्जिन बढ़ोतरी से दबाव, निवेशकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए
सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) ने कॉपर के बाद अब सोने और चांदी पर भी मार्जिन मनी बढ़ा दी है। सोने पर मार्जिन 6% से बढ़ाकर 8% और चांदी पर 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है।
मार्जिन बढ़ने का मतलब है कि ट्रेडर्स को पहले की तुलना में ज्यादा रकम सिक्योरिटी के तौर पर जमा करनी होगी। जिन निवेशकों के पास अतिरिक्त पैसा नहीं होता, उन्हें मजबूरी में अपनी पोजिशन काटनी पड़ती है। जब बड़ी संख्या में बिकवाली होती है, तो कीमतों पर दबाव बनता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क जरूर जांचें और कीमतों को IBJA जैसी आधिकारिक वेबसाइट से क्रॉस चेक करें। वहीं असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट, आइस, स्मेल और क्लॉथ टेस्ट जैसे घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं।
भारत में सोने की ताकत GDP से ज्यादा वैल्यू
एक अहम रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कुल वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब ₹450 लाख करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जो देश की कुल GDP (₹370 लाख करोड़) से भी ज्यादा है।
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है।
फिलहाल घरेलू बाजार में सोना करीब ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार ट्रेड कर रहा है, जो इसकी मजबूत मांग और निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
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