बिना शादी सहमति से संबंध खराब चरित्र का आधार नहीं: Supreme Court का बड़ा फैसला

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि दो अविवाहित बालिगों के बीच सहमति से बने संबंध किसी व्यक्ति के चरित्र को खराब बताने का आधार नहीं हो सकते। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस पर जोर दिया कि भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है जो इन दो व्यक्तियों की रिश्तेदारी को गलत ठहराए।

कोर्ट केस का संदर्भ

इस टिप्पणी का संदर्भ तेलंगाना स्टेट लेवल पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड के मामले से था, जहां एक उम्मीदवार की पुलिस कांस्टेबल भर्ती को रद्द कर दिया गया था। उसे आरोपित किया गया था कि उसने 2014 में शादी का वादा कर दुष्कर्म किया। भर्ती बोर्ड ने इसे नैतिक अधमता का मामला मानकर अयोग्य ठहराया।

एक असफल प्रेम कहानी

पुलिस कांस्टेबल भर्ती रद्द होने का मामला दरअसल एक असफल प्रेम संबंध से जुड़ा था। रिकॉर्ड के अनुसार, उम्मीदवार और शिकायतकर्ता पड़ोसी थे और चार साल तक एक-दूसरे के साथ रिश्ते में रहे। बाद में, दोनों के बीच समझौता हो गया और मामला 2015 में लोक अदालत में समाप्त हो गया।

कानून का नकारात्मक प्रभाव

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में आरोपी को निर्दोष माना जाएगा जब तक कि आरोप साबित न हो जाएं। यह बयान इस बात को भी दर्शाता है कि समाज में सहमति से बने रिश्तों को कैसे देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की दूसरी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि कुछ पदों के लिए कम शैक्षणिक योग्यता रखने वालों के लिए आरक्षित नौकरी के लिए अपनी उच्च डिग्री छिपाना, असली हकदार से रोजगार छीनने जैसा है। कानून के अनुसार, ऐसे मामलों में भर्ती अमान्य मानी जाएगी।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह निर्णय न केवल इस विशेष मामले पर असर डालता है, बल्कि समाज में विवाहपूर्व रिश्तों के प्रति सोचने के तरीके को भी बदल सकता है। अदालत ने यह सिद्ध कर दिया है कि अविवाहितों के बीच रिश्ता एक नैतिक धारणा है और इसे कानूनी दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

भविष्य की संभावना

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से युवा पीढ़ी को एक महत्वपूर्ण संदेश मिल रहा है कि वे अपने व्यक्तिगत जीवन में स्वतंत्रता का अनुभव कर सकते हैं, बशर्ते वे सहमति से संबंध बनाएं। यह भी देखना होगा कि क्या सरकार इससे संबंधित कानूनों में कोई बदलाव लाने की दिशा में कदम उठाएगी।

समाज में बदलाव की आवश्यकता

समाज में अविवाहितों के बीच सहमति आधारित रिश्तों को समझना और स्वीकारना आवश्यक है। यह निर्णय उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो अपने रिश्तों को लेकर खुलकर बात करना चाहते हैं।

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