स्वतंत्रता दिवस पर शौर्य का सम्मान: पुलिस और फायर सर्विस के 301 जांबाजों को वीरता पदक

The CSR Journal Magazine

देश के वीरों को सलाम: पुलिस और फायर सर्विस के 301 जवानों को वीरता पदक से नवाजेगा केंद्र

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और जन-सुरक्षा के मोर्चे पर अदम्य साहस तथा उत्कृष्ट कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले जांबाजों के लिए बड़े पुरस्कारों की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस वर्ष पुलिस, अग्निशमन सेवा (फायर सर्विस), होम गार्ड व नागरिक रक्षा (HG&CD) और सुधारात्मक सेवाओं के कुल 1,057 अधिकारियों और जवानों को वीरता एवं सेवा पदकों से सम्मानित किया गया है।इस संपूर्ण सम्मान सूची में सबसे प्रमुख आकर्षण ‘वीरता पदक’ (Medal for Gallantry – GM) रहे हैं, जिनकी कुल संख्या 301 है। केंद्र सरकार ने अपने वक्तव्य में बताया कि ये पदक सुरक्षाकर्मियों को विषम परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह न करते हुए नागरिकों की रक्षा करने, अपराध रोकने और राष्ट्र की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए प्रदान किए गए हैं।

वीरता पदकों का वर्गीकरण: पुलिस और फायर सर्विस का समन्वय

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, कुल घोषित 301 वीरता पदकों में से 272 पदक विभिन्न राज्यों और केंद्रीय बलों के पुलिसकर्मियों को दिए गए हैं, जबकि नागरिकों को अग्नि दुर्घटनाओं और आपदाओं से सुरक्षित निकालने वाले अग्निशमन सेवा (फायर सर्विस) के 29 जांबाज जवानों को इस वर्ष वीरता पदक से नवाजा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वीरता पदक (GM) देने का निर्णय केवल पद या वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारी या जवान द्वारा अपने नियमित कर्तव्यों से परे जाकर उठाए गए वास्तविक जोखिम, त्वरित निर्णय क्षमता और प्रदर्शित किए गए ‘विशिष्ट शौर्य कार्य’ (Conspicuous act of Gallantry) के गहन मूल्यांकन के बाद लिया जाता है। इसमें इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि जवान ने देश और समाज के हित में कितना बड़ा खतरा मोल लिया था।

क्षेत्रीय वितरण: उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर के जांबाजों का दबदबा

इस वर्ष के वीरता पुरस्कारों की भौगोलिक और क्षेत्रीय संरचना को देखा जाए, तो देश के संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों का पलड़ा भारी रहा है। आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर सबसे कठिन माने जाने वाले क्षेत्रों में जवानों ने अद्वितीय पराक्रम का परिचय दिया है।

वामपंथी उग्रवाद (नक्सल प्रभावित क्षेत्र)

कुल 301 वीरता पदकों में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 197 पदक उन जांबाज सुरक्षाकर्मियों को दिए गए हैं, जिन्होंने देश के आंतरिक हिस्सों में वामपंथी उग्रवाद या नक्सलवाद का मुकाबला करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया है।

जम्मू और कश्मीर क्षेत्र

सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद और घुसपैठ का डटकर सामना करने वाले जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों के 51 जवानों को उनकी बहादुरी के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया है।

पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) क्षेत्र

देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियानों और शांति व्यवस्था की बहाली में अनुकरणीय योगदान देने वाले 12 कर्मियों को इस प्रतिष्ठित पदक के लिए चुना गया है। इसके अलावा देश के विभिन्न अन्य हिस्सों में सामान्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जटिल आपराधिक अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले 41 जवानों को उनके साहसिक कार्यों के लिए पदक दिए गए हैं।

विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (PSM) की घोषणा

वीरता पदकों के समानांतर, केंद्र सरकार ने देश भर के 92 अधिकारियों और जवानों को ‘विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक’ (President’s Medal for Distinguished Service – PSM) देने की घोषणा की है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह पदक उन अधिकारियों को प्रदान किया जाता है जिनका पूरी सेवा के दौरान एक विशेष, निरंतर और उत्कृष्ट प्रदर्शन का विशिष्ट रिकॉर्ड रहा हो।विशिष्ट सेवा के लिए दिए गए इन 92 राष्ट्रपति पदकों का सेवा-वार विवरण इस प्रकार है।
पुलिस सेवा: इस सर्वोच्च श्रेणी में सबसे अधिक 83 पदक पुलिस अधिकारियों को मिले हैं।
अग्निशमन सेवा: अग्निशमन विभागों में दीर्घकालिक और असाधारण नेतृत्व प्रदान करने वाले 4 कर्मियों को यह पदक मिला है।
नागरिक सुरक्षा एवं होम गार्ड सेवा: जन-भागीदारी और आपातकालीन प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 3 कर्मियों को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है।
सुधारात्मक सेवा: कारागार प्रशासन और सुधारात्मक प्रणालियों में विशेष सुधार करने वाले 2 अधिकारियों को इस सम्मान सूची में स्थान मिला है।

कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण: 664 सराहनीय सेवा पदक (MSM)

सुरक्षा तंत्र को सुचारू रूप से चलाने और अपने कर्तव्यों के प्रति अटूट निष्ठा बनाए रखने वाले मध्यम व कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष सरकार ने कुल 664 ‘सराहनीय सेवा पदक’ (Medal for Meritorious Service – MSM) प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह पदक मूल्यवान सेवा, संसाधनशीलता और कर्तव्य के प्रति समर्पण को रेखांकित करता है। सराहनीय सेवा पदक (MSM) प्राप्त करने वाले 664 कर्मियों का वर्गीकरण निम्नलिखित है-
पुलिस कर्मी: कुल 606 पुलिस जवानों और अधिकारियों को कर्तव्यनिष्ठा के लिए यह पदक दिया गया है।
अग्निशमन सेवा: अग्निशमन विभागों के 28 अधिकारियों व कर्मचारियों को इसमें जगह मिली है।
नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड: इस मोर्चे पर उत्कृष्ट सेवा देने वाले 18 कर्मियों को पदक घोषित हुआ है।
सुधारात्मक सेवा: कारागार प्रबंधन से जुड़े 12 कर्मियों को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के 21 कर्मियों को विशेष सम्मान

इस वर्ष देश की शीर्ष जांच एजेंसी, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पदक विजेताओं में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई है। CBI के कुल 21 कर्मियों को उनके बेदाग सेवा रिकॉर्ड, जटिल मामलों की गुत्थी सुलझाने और उत्कृष्ट विधिक व तकनीकी सूझबूझ के लिए पदक सूची में शामिल किया गया है।सम्मानित होने वाले CBI के प्रमुख अधिकारियों में निम्नलिखित नाम शामिल हैं-
विधिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ: डिप्टी लीगल एडवाइजर बृजेश सिंह और सीनियर सिस्टम एनालिस्ट गिरीश जोशी।
जांच अधिकारी (डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस – DySP): मनोज कुमार, ओम प्रकाश चंद्र, जाहिर अख्तर अंसारी और आशीष आनंद।
निरीक्षक एवं उप-निरीक्षक स्तर: इंस्पेक्टर सरिता यादव और सब-इंस्पेक्टर रोशन कुमार।
सहायक व हेड कांस्टेबल श्रेणी: असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर दिलबार सिंह बिष्ट, हेड कांस्टेबल बलकार सिंह, गोविंद सिंह बिष्ट और कमलेश कुमार गुर्जर।
कांस्टेबल श्रेणी: कांस्टेबल पाल पांडियन आर, अजय कुमार सिंह और कल्याणदुर्गम समीउल्लाह।
इन अधिकारियों की उत्कृष्ट जांच क्षमता और अथक प्रयासों के कारण ही उन्हें इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के योग्य पाया गया है, जो देश के जांच और विधिक तंत्र में उनके अप्रतिम योगदान को दर्शाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव

भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश दमनकारी शासन से मुक्त हुआ था। स्वतंत्रता दिवस का यह वार्षिक उत्सव जहां एक ओर हमें देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है और देश के विभाजन की उस गहरी त्रासदी व कष्टों का स्मरण कराता है जिसे लाखों परिवारों ने झेला था, वहीं दूसरी ओर यह वर्तमान समय में देश की सीमाओं और आंतरिक शांति की रक्षा करने वाले आधुनिक वीरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी एक राष्ट्रीय मंच है। स्थापित परंपराओं के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगे। लाल किले से होने वाला यह गरिमामयी आयोजन इन सभी 1,057 पदक विजेताओं के शौर्य और निस्वार्थ सेवा को पूरे राष्ट्र के समक्ष गौरवान्वित करने का एक पावन प्रतीक है।

सुरक्षा बलों का बढ़ता मनोबल

गृह मंत्रालय ने राज्यवार और बलवार (Force-wise) पदक विजेताओं की विस्तृत सूची आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है। इस घोषणा के बाद से देश की विभिन्न सुरक्षा इकाइयों, पुलिस लाइनों और अग्निशमन केंद्रों में उत्साह का माहौल है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे राष्ट्रीय पुरस्कारों से न केवल पुरस्कृत होने वाले जवानों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी में भी राष्ट्र सेवा, अनुशासन और अदम्य साहस की भावना का संचार होता है। नक्सलियों के गढ़ से लेकर कश्मीर की बर्फीली चोटियों तक और जलती इमारतों के बीच से नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने वाले ये 1,057 जांबाज आज संपूर्ण भारत वर्ष के लिए प्रेरणापुंज बन चुके हैं।

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