ड्रेस कोड पर दंगल: यूपी-एमपी के लेंसकार्ट स्टोर्स में चला ‘तिलक अभियान’

The CSR Journal Magazine

लेंसकार्ट के ड्रेस कोड पर यूपी-एमपी में उबाल: कर्मचारियों को तिलक लगा रहे लोग

हाल के दिनों में मशहूर आईवियर ब्रांड ‘लेंसकार्ट’ (Lenskart) अपने एक विवादित ‘ड्रेस कोड’ या ग्रूमिंग पॉलिसी को लेकर देशव्यापी चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कंपनी की एक कथित गाइडलाइन में हिंदू धार्मिक प्रतीकों जैसे तिलक, बिंदी और कलावे पर पाबंदी लगाने की बात कही गई थी, जबकि अन्य धर्मों के प्रतीकों को छूट दी गई थी। इस खबर ने न केवल डिजिटल दुनिया में ‘बॉयकॉट लेंसकार्ट’ (Boycott Lenskart) की लहर पैदा की, बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लोगों के गुस्से को सड़कों पर ला दिया। जगह-जगह हिंदू संगठनों ने स्टोर्स में जाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे यह मामला व्यावसायिक अनुशासन बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की एक बड़ी बहस में बदल गया। 

धर्म और फैशन का संग्राम

आईवियर कंपनी लेंसकार्ट के ड्रेस कोड को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विरोध की लहर देखने को मिल रही है। हिंदू संगठनों से जुड़े लोग लेंसकार्ट स्टोर में घुसकर कर्मचारियों को तिलक लगाने में जुटे हैं। इस विवाद का मुख्य कारण कंपनी का एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट है, जिसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से मना किया गया है। वहीं, हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई।

सोशल मीडिया का दबाव

पिछले हफ्ते, सोशल मीडिया पर इस पॉलिसी डॉक्यूमेंट का एक क्लिप वायरल हुआ, जिसके बाद विरोध शुरू हुआ। बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि लेंसकार्ट का मालिक भारत में रहकर ऐसे नियम लागू कर रहा है, तो उसे अपनी कंपनी लाहौर में खोलनी चाहिए। उनका यह बयान अब चर्चा का विषय बन गया है।

राज्यों में बढ़ते विरोध प्रदर्शन

यूपी और एमपी के कई शहरों में हिंदू संगठनों के लोग स्टोर्स में घुसे और कर्मचारियों को तिलक लगाकर और कलावा बांधकर विरोध दर्ज कराया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट स्टोर में कर्मचारियों को तिलक लगाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए कि “सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” छत्तीसगढ़ में रायपुर के लेंसकार्ट शोरूम में भी इसी तरह के विरोध की तस्वीरें आई हैं। एक धार्मिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों से कहा कि वे तिलक लगाकर काम करें और अपनी पहचान बताएं।

गाजियाबाद में बीजेपी विधायक का बयान

गाजियाबाद के लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने भी इस मामले में टिप्पणी की। उन्होंने लेंसकार्ट के ड्रेस कोड के विरोध में प्रदर्शन किया और कहा कि ऐसे प्रतिबंध गलत हैं। उन्होंने कंपनी के मालिक की जांच करने की मांग की और यह भी कहा कि उनके परिवार का धर्म संदिग्ध है। यह बयान पूरे विवाद को और गर्म कर रहा है।

महाराष्ट्र में हंगामा

बीजेपी नेता नाजिया इलाही खान ने मुंबई के अंधेरी स्थित लेंसकार्ट स्टोर में जाकर हंगामा किया। उन्होंने कंपनी की ड्रेस पॉलिसी को लेकर मैनेजर से बहस की और हिंदू कर्मचारियों को तिलक लगाने के लिए कहा। यह घटनाओं का सिलसिला अब तक जारी है और लोगों की भावनाएं भड़क रही हैं।

कंपनी का पक्ष

विवाद बढ़ता देख लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना और गलत है। विवाद बढ़ता देख सीईओ पीयूष बंसल ने माफी मांगी और स्पष्ट किया कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना था. अब कंपनी ने नई स्टाइल गाइड जारी की है जिसमें सभी धार्मिक प्रतीकों (तिलक, बिंदी, कलावा, हिजाब आदि) की स्पष्ट अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है और उन्हें कर्मचारी की व्यक्तिगत पसंद की कद्र है। हालांकि, इस पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या वास्तव में कंपनी की मौजूदा गाइडलाइन सभी के लिए समान है।

क्या है विवादित डॉक्यूमेंट में?

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ग्रूमिंग गाइड के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को स्टोर में बिंदी या कलावा पहनने की अनुमति नहीं है। हाथ में पहनने वाले धार्मिक धागों को भी हटाने का निर्देश दिया गया है। इस गाइड में हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई है, लेकिन शर्तों के साथ। हालांकि, बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने पर रोक लगाई गई है। इस मुद्दे पर बहस अभी भी जारी है।

Workplace Policies में संवैधानिक सावधानी जरूरी

इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में किसी भी कॉर्पोरेट ब्रांड के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता का सम्मान करना अनिवार्य है। हालांकि, लेंसकार्ट के सीईओ पीयूष बंसल ने इस विवाद पर माफी मांगते हुए इसे एक ‘पुराना और त्रुटिपूर्ण दस्तावेज’ बताया और तत्काल प्रभाव से एक नई ‘समावेशी स्टाइल गाइड’ जारी कर दी है, जिसमें सभी धार्मिक प्रतीकों की अनुमति दी गई है। लेकिन यह विवाद अन्य कंपनियों के लिए एक सबक है कि कार्यस्थल की नीतियों (Workplace Policies) को बनाते समय संवैधानिक अधिकारों और जनभावनाओं की अनदेखी करना ब्रांड की छवि के लिए भारी पड़ सकता है।

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