शिमला में लेंसकार्ट विवाद: Lenskart स्टोर में हनुमान चालीसा, तिलक-राखी से विरोध

The CSR Journal Magazine
आईवियर कंपनी लेंसकार्ट ने अपने ड्रेस कोड के लिए हाल ही में विवाद पैदा किया, जिसके खिलाफ आज (बुधवार) को शिमला के संजौली स्थित स्टोर में हिंदू संघर्ष समिति ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्टोर के भीतर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और लेंसकार्ट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह घटना तब हुई जब सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट की एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुई, जिसमें कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक, कलावा और बुर्का पहनने पर रोक लगाने की बात कही गई है। यह दस्तावेज़ कई लोगों के लिए विवाद का कारण बन गया।

राखी और तिलक का सांकेतिक प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान, हिंदू संघर्ष समिति के सदस्यों ने लेंसकार्ट स्टोर के सभी कर्मचारियों को राखी बांधी और तिलक लगाया। यह एक सांकेतिक पहल थी ताकि हिंदू संस्कृति के प्रति सम्मान और एकता का प्रतीक बने। वायरल हुए डॉक्यूमेंट के खिलाफ लोग अपनी आवाज उठाने के लिए इस प्रकार का प्रदर्शन कर रहे हैं। शिमला से पहले, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी लेंसकार्ट के खिलाफ इसी तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं।

सीईओ ने दी सफाई

भड़कने के बाद, लेंसकार्ट के संस्थापक और सीईओ पियूष बंसल ने इस मुद्दे पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट “गलत” है और यह कंपनी की वर्तमान नीतियों का सही प्रतिबिंब नहीं है। उनके इस बयान ने प्रदर्शनकारियों के गुस्से को कम करने में मदद नहीं की है। प्रदर्शन के दौरान, विजय संघर्ष समिति के पदाधिकारी विजय ने कहा कि “कॉर्पोरेट जिहाद” के जरिए हिंदू भावनाओं को आहत किया जा रहा है।

सभी राज्यों में बढ़ता विरोध

यह केवल शिमला में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी लेंसकार्ट के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि लोग अब अपनी संस्कृति और परंपरा के खिलाफ किसी भी तरह के नीतिगत बदलाव को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इस तरह के विवादों से कंपनियों को सबक लेने की जरूरत है, ताकि वे अपनी नीतियों में बदलाव करते समय सभी समुदायों का ध्यान रख सकें।

क्यों हो रहा है विवाद?

लेंसकार्ट का बिंदियों, तिलक और अन्य हिंदू संस्कृति से जुड़े प्रतीकों पर रोक लगाने का प्रस्ताव जल्द ही विवाद का विषय बन गया। इस तरह की नीतियों को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है, क्योंकि वे इसे धार्मिक भेदभाव मानते हैं। कंपनियों को यह समझना होगा कि उनके निर्णय समाज में कैसे प्रभाव डाल सकते हैं।

आगे की राह

अब देखना यह है कि लेंसकार्ट भविष्य में इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है। हिंदू संघर्ष समिति और अन्य समुदायों के सदस्यों का विरोध बढ़ता जा रहा है, और कंपनियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या लेंसकार्ट अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाएगी या विरोध को अनदेखा करेगी।

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