UGC ने दिया 12 राज्यों में सक्रिय 32 फर्जी संस्थान बंद करने का आदेश

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UGC का बड़ा अलर्ट! 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट जारी, EdTech कंपनियों से सावधान रहें!

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश के शिक्षा क्षेत्र में धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक बड़ा अलर्ट जारी करते हुए 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की आधिकारिक सूची जारी की है और साथ ही छात्रों को भ्रामक विज्ञापनों के जरिए लुभाने वाली एडटेक (EdTech) कंपनियों से सावधान रहने की कड़ी चेतावनी दी है। राज्यसभा में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ये अवैध संस्थान बिना किसी सरकारी या यूजीसी मंजूरी के संचालित हो रहे हैं और इनके द्वारा बांटी जा रही डिग्रियों की कोई कानूनी वैधता नहीं है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को इन फर्जी संस्थानों को तुरंत बंद करने और इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

UGC का बड़ा हंटर: देश भर में 32 फर्जी विश्वविद्यालय ब्लैकलिस्टेड

भारत में उच्च शिक्षा की नियामक संस्था, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्रों और अभिभावकों के भविष्य की सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे बड़ा देशव्यापी अलर्ट जारी किया है। यूजीसी द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 32 ऐसी संस्थाएं सक्रिय पाई गई हैं, जो खुद को ‘विश्वविद्यालय’ बताकर अवैध रूप से डिग्रियां बांट रही हैं और छात्रों से मोटी रकम वसूल रही हैं। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने इस बात की पुष्टि की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन 32 संस्थानों को यूजीसी अधिनियम, 1956 के तहत किसी भी प्रकार की डिग्री प्रदान करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके साथ ही, यूजीसी ने डिजिटल शिक्षा के नाम पर चल रही एडटेक कंपनियों के ‘अवैध फ्रैंचाइज़ मॉडल’ को लेकर भी छात्रों को सचेत किया है।

राज्यों का गणित: दिल्ली और उत्तर प्रदेश फर्जीवाड़े के मुख्य केंद्र

UGC द्वारा जारी राज्यवार सूची का विश्लेषण करने पर यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि देश की राजधानी दिल्ली इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा गढ़ बनी हुई है। 32 फर्जी विश्वविद्यालयों में से अकेले 12 संस्थान दिल्ली में चल रहे हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है, जहां 4 फर्जी विश्वविद्यालय पकड़े गए हैं। इस बार की सूची में चार नए राज्यों, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश का नाम भी शामिल हुआ है, जहां पहली बार ऐसे फर्जी संस्थानों की पहचान की गई है।

प्रमुख फर्जी विश्वविद्यालयों की राज्यवार सूची

दिल्ली (12 संस्थान): कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड (दरियागंज), यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, वोकेशनल यूनिवर्सिटी, एडीआर-सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट, आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (रोहिणी), वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंसेज (अलीपुर)।
उत्तर प्रदेश (4 संस्थान): गांधी हिंदी विद्यापीठ (प्रयागराज), नेताजी सुभाष चंद्र बोस ओपन यूनिवर्सिटी (अलीगढ़), भारतीय शिक्षा परिषद (लखनऊ), और महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी (नोएडा)।
पश्चिम बंगाल (2 संस्थान): इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन (कोलकाता) और इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च (कोलकाता)।
महाराष्ट्र (2 संस्थान): राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी (नागपुर) और नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ (सोलापुर)।
आंध्र प्रदेश (2 संस्थान): क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी (गुंटूर) और बाइबल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इंडिया (विशाखापट्टनम)।
कर्नाटक (2 संस्थान): ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी (बेंगलुरु) और सर्व भारतीय शिक्षा पीठ (तुमकुर)।
पुडुचेरी (2 संस्थान): ऊषा लच्छूमनन कॉलेज ऑफ एजुकेशन और श्री बोधी एकेडमी ऑफ Higher Education।
अन्य राज्य (1-1 संस्थान): झारखंड में दक्षा यूनिवर्सिटी (रांची), हरियाणा में मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद), राजस्थान में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (भिवंडी), केरल में सेंट जॉन्स यूनिवर्सिटी, और अरुणाचल प्रदेश में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव Medicine।

एडटेक (EdTech) कंपनियों का मायाजाल: UGC की सख्त हिदायत

इस वर्ष के अलर्ट की सबसे बड़ी बात एडटेक (Education Technology) कंपनियों के खिलाफ UGC का कड़ा रुख है। पिछले कुछ समय से कई बड़ी एडटेक कंपनियां अखबारों, टेलीविजन और सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापन दे रही हैं। ये कंपनियां दावा करती हैं कि वे यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के सहयोग से ऑनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग (ODL) मोड में डिग्री और डिप्लोमा कोर्स करवा रही हैं और शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की गारंटी देती हैं।

UGC का आधिकारिक बयान

कोई भी विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान (HEI) किसी भी एडटेक कंपनी के साथ मिलकर ‘फ्रैंचाइज़ व्यवस्था’ के तहत कोर्स ऑफर नहीं कर सकता। यूजीसी के नियमों के अनुसार इस तरह के सभी समझौते पूरी तरह अवैध हैं। यदि कोई छात्र किसी एडटेक प्लेटफॉर्म के बहकावे में आकर ऐसे किसी कोर्स में दाखिला लेता है, तो उसकी डिग्री को यूजीसी द्वारा मान्यता नहीं दी जाएगी। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि केवल वही ऑनलाइन या दूरस्थ डिग्रियां मान्य होंगी जो सीधे यूजीसी के दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो (DEB) से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से संचालित की जा रही हों।

फर्जी डिग्रियों का भविष्य: ‘केवल रद्दी कागज का टुकड़ा’

यूजीसी ने छात्रों और नौकरी देने वाले नियोक्ताओं को आगाह किया है कि इन फर्जी विश्वविद्यालयों द्वारा जारी की गई मार्कशीट या डिग्रियां पूरी तरह से अमान्य हैं।
सरकारी नौकरियों में अमान्य: इन डिग्रियों के आधार पर केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता। यदि कोई छात्र ऐसी डिग्री लगाता है, तो उसे धोखाधड़ी का दोषी माना जाएगा।
उच्च शिक्षा के लिए बेकार: इन संस्थानों से स्नातक (Graduation) करने के बाद छात्र देश या विदेश के किसी भी वैध विश्वविद्यालय में आगे की पढ़ाई (जैसे पोस्ट ग्रेजुएशन या पीएचडी) के लिए दाखिला नहीं ले सकते।
आर्थिक और मानसिक नुकसान: छात्र और उनके माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई इन संस्थानों की भारी-भरकम फीस में गंवा देते हैं और अंत में उनका कीमती समय भी बर्बाद हो जाता है।

सरकार का एक्शन प्लान: दर्ज होंगी FIR, बंद होंगे संस्थान

शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी इस बार केवल सूची जारी करके शांत नहीं बैठे हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार ने सभी संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और शिक्षा सचिवों को पत्र लिखकर इन संस्थानों के खिलाफ तत्काल कानूनी कदम उठाने को कहा है।

संस्थानों को कारण बताओ नोटिस

UGC ने इन सभी 32 स्वघोषित विश्वविद्यालयों को कारण बताओ नोटिस और चेतावनी पत्र जारी कर जवाब मांगा है। राज्यों से कहा गया है कि वे यूजीसी अधिनियम, 1956 का उल्लंघन करने और छात्रों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में इन संस्थानों के प्रबंधकों के खिलाफ स्थानीय थानों में तुरंत FIR दर्ज कराएं। केंद्र ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो संस्थान अपने नाम के आगे ‘विश्वविद्यालय’ शब्द का अवैध उपयोग कर रहे हैं और डिग्रियां बांट रहे हैं, उन्हें तुरंत सील कर बंद किया जाए। यूजीसी का एंटी-मालप्रैक्टिस सेल लगातार राज्यों के साथ मिलकर देश के अन्य हिस्सों में चल रहे ऐसे किसी भी संदिग्ध संस्थान की निगरानी कर रहा है जो इस सूची से बाहर हो सकते हैं।
शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय होने के कारण केंद्र और राज्य दोनों की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इन गिरोहों का पूरी तरह खात्मा करें। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी संस्थान को फीस देने या अपने दस्तावेज सौंपने से पहले ‘पहले जांचें, फिर दाखिला लें’ का नियम अपनाएं।

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