बंगाल में UCC लागू करने की तैयारी तेज, ड्राफ्ट बनाने के लिए कमेटी गठित

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी प्रदेश में UCC बिल का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा पहले किए गए ऐलान के बाद, अब इस कमेटी का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है।

कमेटी की ड्यूटी और समय सीमा

यह नौ सदस्यीय कमेटी UCC बिल, 2026 के ड्राफ्ट की समीक्षा करेगी। कमेटी को चार हफ्ते का समय दिया गया है। इसके बाद, राज्य सरकार इस बिल को अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र में पेश कर सकती है। कमेटी की जिम्मेदारी केवल ड्राफ्ट तैयार करना नहीं, बल्कि लोगों की राय भी इकट्ठा करना है।

कमेटी के महत्वपूर्ण सदस्य

कमेटी में कई प्रमुख सदस्य हैं, जिनमें मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, IAS ऑफिसर शत्रुघ्न सिंह और कलकत्ता हाई कोर्ट के वकील उस्मान गनी मलिक शामिल हैं। ये सदस्य राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों की राय लेने का कार्य करेंगे। ऐसा कर के, वे UCC से संबंधित सभी आशंकाओं और सुझावों को ध्यान में रखेंगे।

सामाजिक विचार विमर्श का महत्व

सूत्रों के अनुसार, नबान्न स्थित अधिकारियों ने बताया है कि समिति अगले डेढ़ महीने में लोगों से प्रतिक्रिया लेने के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। इस प्रक्रिया में पब्लिक कंसल्टेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। रिटायर्ड जज ने हाल ही में दिल्ली में मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल से मुलाकात की थी, जिसमें UCC से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की गई।

UCC में शामिल प्रस्तावित मुद्दे

यूनिफॉर्म सिविल कोड के ड्राफ्ट में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल किए जा सकते हैं। इनमें एक से अधिक शादियों पर प्रतिबंध, पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, बाल विवाह पर रोकथाम, और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए नियम शामिल हो सकते हैं। राज्य सरकार इन मुद्दों की गंभीरता से समीक्षा कर रही है।

राजनीतिक माहौल और प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा है कि UCC को उचित प्रक्रिया के तहत लागू किया जाएगा। यह राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चुनावी वादा का हिस्सा है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रस्तावित कानून का विरोध करना शुरू कर दिया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं को बिल के खिलाफ आवाज उठाने के निर्देश दिए हैं।

विपक्ष की चिंताएँ

विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने सरकार की टाइमलाइन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों से संबंधित कानून को लागू करने से पहले व्यापक जनसंपर्क होना चाहिए। यह मांग विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा के महत्व को उजागर करती है। इस प्रक्रिया में हरेक वर्ग की राय को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

बंगाल का कानूनी ढांचा बदलने का वक्त

यूसीसी को लेकर बंगाल में चल रही राजनीति और प्रक्रियाएँ सुनिश्चित करेंगी कि राज्य का कानूनी ढांचा जल्द ही महत्वपूर्ण बदलावों से गुजरे। इस कड़ी में, UCC का ड्राफ्ट और इसकी समीक्षा न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण

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