सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश के लिए कई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन दिशा-निर्देशों में एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण सड़कों पर भारी वाहनों के पार्किंग पर रोक लगाई गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक लापरवाही या खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते एक्सप्रेसवे को फटेहाल और खतरनाक नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
सड़क और परिवहन मंत्रालय, NHAI को निर्देश
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने सड़क और परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाएं। बेंच ने यह भी बताया कि भारत के राष्ट्रीय हाईवे कुल सड़क लंबाई का केवल 2% हैं, परंतु सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में इनका योगदान लगभग 30% है।
सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या
13 अप्रैल को जारी ये निर्देश तब सामने आए जब सुप्रीम कोर्ट ने दो बड़े सड़क हादसों की सुनवाई की, जिनमें राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में लगातार हुई दुर्घटनाओं में 34 लोगों की जान चली गई। इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण सिस्टम की लापरवाही और बुनियादी ढांचे में कमी बताई गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएं किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
खास बिंदुओं पर आधारित दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी दिशा-निर्देश 6 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित हैं। इनमें सड़क पर भारी वाहनों की पार्किंग को रोकने की व्यवस्था का सुनिश्चित करना, यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना, और सड़क सुधार कार्यों को प्रभावी तरीके से लागू करना शामिल है। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य सड़क सुरक्षा में व्यापक सुधार लाना है।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनों को चाहिए कि वे सड़क सुरक्षा के मुद्दों को गंभीरता से लें और नियमों का पालन सुनिश्चित करें। यह न सिर्फ सड़क इस्तेमाल करने वालों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में मदद करेगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को भी घटाएगा। बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक, सभी स्तरों पर सड़क सुरक्षा में सुधार की आवश्यकता है।
सिरिनाम के मामलों पर टिप्पणी
इस बीच, कोर्ट ने सबरीमाला केस में भी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है कि धार्मिक मामलों के फैसले में संविधान को निजी धार्मिक मान्यताओं से ऊपर रखा जाना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने जिक्र किया कि ऐसे मामलों में स्वतंत्रता और संविधान की सीमाओं का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
भविष्य की दिशा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि सड़क सुरक्षा के मामले में ठोस कार्यवाही की जाएगी। प्रशासन और नागरिकों को मिलकर इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा, जिससे सड़कों पर हर किसी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व स्थानीय निकायों को मिलकर काम करना होगा ताकि सड़कें सुरक्षित बन सकें।
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