पुरुष या महिला… बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा सांप किसे काटते हैं?

The CSR Journal Magazine
भारत में हर साल मानसून आते ही सांप के काटने के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि सांप किसे सबसे ज्यादा काटते हैं? हालिया आंकड़े यह बताते हैं कि सांप कुछ खास लोगों को ज्यादा निशाना बनाते हैं। इनमें मुख्य रूप से पुरुष, खेतों में काम करने वाले किसान और ग्रामीण आबादी शामिल हैं। यह समस्या केवल स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक मुद्दा भी बन गई है।

पुरुषों की बढ़ती संख्या

अध्ययन से पता चला है कि सांप के काटने में पुरुषों की संख्या अधिक होने का कारण उनका कृषि, पशुपालन और निर्माण कार्यों में होना है। निस्संदेह, इन कामों के दौरान जोखिम अधिक होता है। इसके अलावा, गरीब परिवारों में घर की स्थिति कमजोर होने और अस्पतालों तक पहुंचने में देरी जैसी समस्याएं भी खतरे को बढ़ा देती हैं। इस तरह विशेषज्ञ इसे स्वास्थ्य समस्या के साथ-साथ एक उपेक्षित बीमारी मानते हैं।

सांप के काटने के मामले

एक हालिया अध्ययन में 25 जिलों से सांप के काटने के कुल 7,094 मामले सामने आए। इनमें से 64.1% पुरुष थे। सबसे ज्यादा मामले 30 से 39 वर्ष के आयु वर्ग में देखे गए। पेशेवर आंकड़ों के अनुसार, मजदूर और किसान सबसे प्रभावित रहे। 62% घटनाएं मानसून के दौरान हुईं, जिसमें दो प्रतिशत से भी कम लोग अस्पताल में दम तोड़ते हैं।

गरीब परिवारों का संकट

अध्ययन में बताया गया कि सांप के काटने के मामलों में 53% पीड़ित गरीब परिवारों से हैं। दरअसल, कच्चे मकान, फर्श पर सोने की मजबूरी और अस्पतालों की दूरी जैसे कारण उस स्थिति को और गंभीर बनाते हैं। अक्सर, लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।

जिससे समय पर मौत

अध्ययन में यह भी सामने आया कि करीब 43% मौतें अस्पताल पहुंचने से पहले होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर सही उपचार मिल जाए, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। लेकिन गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और एंबुलेंस की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। यही कारण है कि डॉक्टरों का सुझाव होता है कि सांप के काटने के बाद बिना देरी के अस्पताल जाना चाहिए।

बारिश का सांपों पर प्रभाव

मानसून के दौरान सांपों की संख्या में तेजी से वृद्धि होती है। जब बारिश होती है, तो सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। इसके अतिरिक्त, इस समय खेती का काम भी बढ़ जाता है, जिससे किसानों और मजदूरों का सांपों से सामना भी बढ़ता है। रात के समय बाहर जाने वाले लोग भी सांपों के लिए संभावित शिकार बन जाते हैं।

खतरनाक राज्य

आंकड़ों के मुताबिक, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों में सांप के काटने के मामले ज्यादा होते हैं। इन राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच और समय पर चिकित्सा की कमी, इस समस्या को और बढ़ाती है।

वैश्विक आंकड़े

पूरी दुनिया में सांप के काटने की समस्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। हर साल लगभग 54 लाख लोग सांप के काटने से प्रभावित होते हैं, जिनमें से करीब 1.38 लाख लोगों की मौत होती है। भारत में अनुमानित 10 से 15 लाख लोग सांप के काटने का शिकार बनते हैं। ये आंकड़े मानसून के दौरान उच्च

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