रावण ने सीता चुराई थी, इन्होंने भक्तों का भरोसा- राममंदिर चंदा चोरी मामले पर गरजे धीरेंद्र शास्त्री

The CSR Journal Magazine

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: धीरेंद्र शास्त्री का भावुक बयान, कहा “रावण का नया रूप” 

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मामले पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इंडोनेशिया दौरे के दौरान एक बेहद तीखा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने इस कृत्य को करने वालों की तुलना रावण से करते हुए इसे “रावण का नया रूप” बताया है।

चढ़ावा चोरी मामले में धर्मगुरु की प्रतिक्रिया

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भावुक होकर प्रतिक्रिया दी। इंडोनेशिया के जकार्ता में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो कुछ हो रहा है, वो रावण का रूप बदलने जैसा है। उनका कहना था कि रावण ने केवल माता जानकी जी की चोरी की थी, लेकिन आज महादेव के आशीर्वाद से जो चढ़ावा चोरी हुआ है, वो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास को कुर्बान करता है। उन्होंने FIR होने की पुष्टि भी की और कहा कि ये मामला गंभीर है।

जकार्ता के मंच से गरजे धीरेंद्र शास्त्री-‘रावण तो ये भी हैं, बस रूप बदल गए हैं’

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित तीन दिवसीय ‘हनुमान कथा’ के दौरान भारत के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। व्यासपीठ से भक्तों को संबोधित करते हुए बाबा बागेश्वर बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने इस चोरी को एक सामान्य वित्तीय अपराध मानने से इनकार कर दिया और इसे सीधे तौर पर सनातन धर्म और वैश्विक हिंदू समाज की आस्था पर आघात बताया। धीरेंद्र शास्त्री ने त्रेतायुग का उदाहरण देते हुए कहा: “रावण तो ये भी हैं, बस इनके रूप बदल गए हैं। रावण ने तो केवल माता जानकी जी की चोरी की थी, जिसका परिणाम यह हुआ कि उसके पूरे वंश का समूल नाश हो गया। लेकिन इन कलयुगी चोरों ने राम मंदिर के दान पात्र से लाखों लोगों की गाढ़ी कमाई की श्रद्धा और करोड़ों भक्तों का अटूट भरोसा चुराया है। ऐसे लोग किसी भी माफी के हकदार नहीं हैं।”

कानूनी सजा तो मिलेगी ही, प्रभु राम की अदालत देगी महादंड

अपने तीखे संबोधन में बागेश्वर महाराज ने चोरी करने वालों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि वे इस पवित्र धन को पचा लेंगे, वे बहुत बड़े भ्रम में हैं। देश का कानून और उत्तर प्रदेश सरकार अपनी जगह सख्त कार्रवाई कर रही है, लेकिन धार्मिक स्थलों पर पाप करने वालों का अंतिम हिसाब भगवान की अदालत में होता है। शास्त्री ने कहा, “राम जी के चरणों में समर्पित दान को चुराने वालों को सरकारी दंड (जेल और कानूनी प्रक्रिया) तो मिलकर ही रहेगा, लेकिन उन्हें भगवान की ओर से वह ‘महादंड’ मिलेगा जिससे उनका कोई रक्षक नहीं बचेगा। जो सच है, वो सच है। किसी को मेरी बात बुरी लगे या भली, मुझे इसकी परवाह नहीं है।”

क्या है पूरा मामला और SIT की कार्रवाई

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और बहुमूल्य आभूषणों की चोरी व हेराफेरी का मामला पहली बार 7 जून को प्रकाश में आया था। श्रद्धालुओं द्वारा दान पात्रों और विशेष रसीदों के माध्यम से दिए गए चंदे में बड़ी वित्तीय विसंगतियां पाई गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और गृह विभाग तुरंत एक्शन में आए। लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

सीसीटीवी फुटेज से खुलासा

मंदिर परिसर के भीतर और रसीद काउंटरों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली गई। जांच में पाया गया कि कुछ कर्मचारी फर्जी रसीद बुक्स और जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर भक्तों से नगदी ले रहे थे और उसे मुख्य ट्रस्ट के खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़प रहे थे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिनमें से 6 मंदिर के ही संविदा कर्मचारी थे जिन्हें दान राशि की गिनती और प्रबंधन का जिम्मा सौंपा गया था।

8 आरोपी सलाखों के पीछे

सुरागों के अनुसार, रामशंकर यादव उर्फ टिन्न समेत आठ आरोपियों को फैजाबाद जेल में रखा गया है। जेल सूत्रों का कहना है कि पहले दिन सभी आरोपी चिंतित और सहमे हुए थे और आपस में इस घटना पर चर्चा करते रहे। उनकी न्यायिक प्रक्रिया सोमवार को फिर से अदालत में होगी। इस मामले में SIT ने कुछ दिन पहले अपनी रिपोर्ट भी पेश की थी, जिससे गिरफ्तारी में तेजी आई।

राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफे का जिक्र

राम मंदिर ट्रस्ट में चल रही गतिविधियों के संदर्भ में कुछ बदलाव हुए हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा चर्चा का विषय बना हुआ है। ट्रस्ट की गतिविधियां भी इस चुराई गई चढ़ावे के मामले में जांच का हिस्सा हैं। ट्रस्ट के 14 सदस्यों की इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। चढ़ावे की चोरी मामले मेंये नित नए अपडेट आ रहे हैं।

मामले पर गरमाई राजनीति

विपक्ष के आरोप और सरकार का रुखराम मंदिर में चंदा और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आते ही देश का राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियां केवल छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर मुख्य प्रभावशाली दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही हैं। विपक्ष ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग उठाई है।

VHP और BJP ने नकारे आरोप

दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत इस मामले को निपटाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पूर्व में ही कहा था कि रामभक्तों की भावनाओं को आहत करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी जांच निष्पक्षता से पूरी की जाएगी।

जांच प्रक्रिया पर बाबा बागेश्वर ने जताया भरोसा

धीरेंद्र शास्त्री ने जकार्ता से दिए अपने बयान में उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हमें यह सूचना मिली है कि मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो चुकी है और जिम्मेदार लोग पकड़े गए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि अभी और जांच होगी, तो इस घिनौने चक्रव्यूह में शामिल अन्य बड़े चेहरे भी बेनकाब होंगे और पकड़े जाएंगे। इस पूरे तंत्र को साफ करना आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी की ऐसी हिम्मत न हो।”

आस्था की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान इस समय देश के करोड़ों हिंदुओं की सामूहिक चेतना और आक्रोश को दर्शाता है। राम मंदिर केवल एक ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष और देश-विदेश के सनातनियों के त्याग का प्रतीक है। ऐसे पावन स्थल के दानपात्र पर डाका डालना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि एक अक्षम्य आध्यात्मिक पाप भी है। धीरेंद्र शास्त्री की इस ‘रावण’ वाली उपमा ने मंदिर प्रशासनों को यह कड़ा संदेश दिया है कि सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता के मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

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