Ram Mandir Chori Mamla: 80 लाख बरामद, पुलिस ने नहीं मांगी रिमांड, जांच पर उठे गंभीर सवाल

The CSR Journal Magazine
Ram Mandir Chori Mamla: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से अब तक करीब 80 लाख रुपये और 900 अमेरिकी डॉलर बरामद किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, मामले में कई बड़े नामों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से जांच प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब जांच एजेंसियों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भूमिका पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।

CO की जांच पर उठ रहे हैं सवाल

इस मामले की जांच कर रहे सीओ आशुतोष त्रिपाठी पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि इतने बड़े आर्थिक अपराध के बावजूद उन्होंने गिरफ्तार आरोपियों की पुलिस रिमांड नहीं मांगी। आमतौर पर ऐसे मामलों में आरोपियों से पूछताछ और पैसे के स्रोत व नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस रिमांड ली जाती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जांच में यह कदम क्यों नहीं उठाया गया। मामले को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि सीओ आशुतोष त्रिपाठी की निकटता ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से है। हालांकि, इस संबंध में किसी आधिकारिक जांच या पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।

FIR में भी कई अहम जानकारियां नहीं

मामले की एफआईआर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि एफआईआर में आरोपियों के पिता का नाम और पूरा पता तक दर्ज नहीं किया गया। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या ट्रस्ट के पास अपने कर्मचारियों या आरोपियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी, या फिर एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही बरती गई।

बड़े नामों पर कार्रवाई की मांग तेज

इस मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा और कर्नाटक के गोपाल राव के नाम भी चर्चा में हैं। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि इन लोगों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हालांकि, इन तीनों के खिलाफ अभी तक किसी अदालत या जांच एजेंसी ने कोई आरोप सिद्ध नहीं किया है। इधर, गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा के दादा जगदंबा मिश्रा ने दावा किया कि “बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा गया है।” उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।

अब जांच पर टिकी हैं निगाहें

राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन के मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं और क्या इस मामले में उठ रहे सवालों के जवाब सामने आते हैं।
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