राहवीर बनें, जीवन बचाएं: सड़क दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वालों को गुमनाम रहने का अधिकार

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राहवीर बनें, जीवन बचाएं: सड़क दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वालों को मिली कानूनी सुरक्षा और गुमनाम रहने का अधिकार

भारत में हर वर्ष लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत केवल इसलिए हो जाती है क्योंकि उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। ऐसे में आम नागरिकों को बिना किसी डर या कानूनी परेशानी के आगे आकर घायल की मदद करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘राहवीर (Good Samaritan)’ अभियान को बढ़ावा दिया है। इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करता है, तो उसे अपनी पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। वह चाहे तो पूरी तरह गुमनाम रह सकता है।

दुर्घटना पीड़ित की मदद करना अब कानूनी रूप से सुरक्षित

मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134A तथा 2020 में अधिसूचित गुड समैरिटन (Good Samaritan) नियमों के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले नागरिकों को विशेष कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति केवल कानूनी झंझट या पुलिस पूछताछ के डर से घायल की सहायता करने से पीछे न हटे।

गुमनाम रहने का पूरा अधिकार

यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना के घायल को अस्पताल पहुंचाता है, तो:
  • उसे अपना नाम, पता या अन्य व्यक्तिगत जानकारी बताना अनिवार्य नहीं है।
  • वह चाहे तो बिना किसी औपचारिकता के अस्पताल से तुरंत जा सकता है।
  • अस्पताल या पुलिस उसे अनावश्यक रूप से रोक नहीं सकते।
  • यदि वह स्वयं गवाह बनना नहीं चाहता, तो उसे इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

पुलिस और अस्पताल की क्या जिम्मेदारी है?

गुड समैरिटन नियमों के अनुसार:
  • घायल को तत्काल प्राथमिक उपचार देना अस्पताल की जिम्मेदारी है।
  • सहायता करने वाले व्यक्ति से अनावश्यक पूछताछ नहीं की जानी चाहिए।
  • यदि वह अपनी पहचान गोपनीय रखना चाहता है तो उसका सम्मान किया जाएगा।
  • केवल स्वेच्छा से सहमत होने पर ही उसका बयान लिया जा सकता है।

गोल्डन ऑवर का महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा “गोल्डन ऑवर” कहलाता है। इसी अवधि में यदि घायल को उचित चिकित्सा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए सरकार नागरिकों से अपील कर रही है कि वे दुर्घटना देखकर तमाशबीन बनने के बजाय तुरंत मदद करें।

राहवीर योजना क्या है?

केंद्र सरकार ने दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए राहवीर योजना शुरू की है। इसके तहत गोल्डन ऑवर के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्ति को ₹25,000 तक का पुरस्कार तथा प्रशंसा प्रमाणपत्र दिया जा सकता है। विभिन्न राज्यों ने भी इस योजना को लागू करना शुरू किया है।

लोगों में डर क्यों रहता है?

लंबे समय तक लोगों के मन में यह धारणा बनी रही कि दुर्घटना पीड़ित की मदद करने पर पुलिस बार-बार बुलाएगी, अदालतों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, घंटों पूछताछ होगी, कानूनी विवाद में फंसना पड़ेगा। इन्हीं आशंकाओं को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और बाद में कानून के माध्यम से गुड समैरिटन को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई।

सड़क सुरक्षा में आम नागरिकों की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार, पुलिस या अस्पतालों की जिम्मेदारी नहीं है। यदि आम नागरिक दुर्घटना के समय त्वरित सहायता प्रदान करें, एम्बुलेंस को सूचना दें और घायल को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करें, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

यदि सड़क दुर्घटना दिखे तो क्या करें?

  • सबसे पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
  • एम्बुलेंस (108/112) या स्थानीय आपातकालीन सेवा को तुरंत सूचना दें।
  • यदि संभव हो तो घायल को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाने में मदद करें।
  • भीड़ लगाने के बजाय राहत कार्य में सहयोग करें।
  • सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने की बजाय जीवन बचाने को प्राथमिकता दें।

जागरूकता अभियान का उद्देश्य

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे #RahVeer अभियान का उद्देश्य नागरिकों में यह विश्वास पैदा करना है कि किसी घायल की मदद करना न केवल मानवीय कर्तव्य है, बल्कि कानून भी उनकी पूरी सुरक्षा करता है। अभियान का संदेश स्पष्ट है—“बिना डर के आगे बढ़िए, किसी की जान बचाइए।”

 एक कदम इंसानियत की ओर

भारत में हर वर्ष होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में अनेक लोगों की जान केवल समय पर सहायता न मिलने के कारण चली जाती है। गुड समैरिटन कानून और राहवीर अभियान इस सोच को बदलने का प्रयास हैं कि मदद करने वाला व्यक्ति किसी कानूनी परेशानी में फंस जाएगा। अब कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि सहायता करने वाले नागरिक को गुमनाम रहने का अधिकार, कानूनी संरक्षण और आवश्यकता पड़ने पर सम्मान एवं पुरस्कार भी मिल सकता है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि दुर्घटना के समय संवेदनशीलता दिखाए और एक सच्चे “राहवीर” की तरह किसी की जिंदगी बचाने में अपनी भूमिका निभाए।
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