‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ का कमाल: पंजाब शिक्षा मॉडल की पूरी इनसाइड स्टोरी

The CSR Journal Magazine

केरल को पछाड़ पंजाब शिक्षा में नंबर-1: बड़े बदलाव की पूरी कहानी, पंजाब के सरकारी स्कूलों ने बदल दी तस्वीर

नीति आयोग की ‘शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट-2026’ और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की PGI 2.0 रिपोर्ट (2024-25) के अनुसार, पंजाब स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पछाड़कर देश का नंबर-1 राज्य बन गया है। कभी वर्ष 2020 में शिक्षा के स्तर पर देश में 27वें स्थान पर फिसल चुका पंजाब आज अपनी बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के कारण शीर्ष पर है।

शिक्षा में आसमान छूते पंजाब के सपने

पंजाब, जो पहले शिक्षा में 27वें स्थान पर था, आज देश में नंबर-1 बन चुका है। यह कहानी है बदलाव की, जहां सरकारी स्कूलों ने उम्मीदों की नई रोशनी बिखेरी है। कभी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा Punjab, आज शिक्षा के गुणवत्ता के मामले में सम्मानित राज्यों को पीछे छोड़ चुका है। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं।

कहानी 2016 से शुरू होती है

2016 से 2020 तक, पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में गिरावट देखी गई। तब यह शिक्षा में 22वें, 26वें और फिर 27वें स्थान पर पहुँच गया। इस दौरान, माता-पिता के मन में एक ही सवाल था कि उनके बच्चों का भविष्य कैसे सुधरेगा। संसाधनों की कमी और बुनियादी ढांचे की अव्यवस्था के बीच बच्चे अपने सपनों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में, 2022 में आम आदमी पार्टी ने सत्ता संभाली और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए।

नीति आयोग की रिपोर्ट में मिली सफलता

नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के अनुसार, पंजाब ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे अग्रणी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहले स्थान पर स्थित किया है। यह केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि लाखों पंजाबी परिवारों के सपनों की जीत है।

शिक्षा का स्तर ऊँचा हुआ

पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है। तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है। गणित में भी पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि अब सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता में सही दिशा में बदलाव आया है।

स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल तकनीक

आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली की व्यवस्था है। 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर मौजूद हैं और 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं। इंटरनेट सुविधाओं का स्तर भी उत्कृष्ट है। यह सब कुछ पंजाब की सोच और प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत है।

‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ (Schools of Eminence) की शुरुआत

राज्य सरकार ने सामान्य सरकारी स्कूलों को आधुनिक ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ में बदला। इन स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम, एडवांस लैब और बेहतरीन खेल सुविधाएं दी गई हैं ताकि गरीब बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी शिक्षा मिले। राज्य के 19 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया गया है। नीति आयोग की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पंजाब के छात्रों ने 82% प्रवीणता (Proficiency) हासिल की है, जबकि केरल 75% पर रह गया।

मेगा पीटीएम (Mega PTM) और जनभागीदारी

पंजाब के इतिहास में पहली बार सरकारी स्कूलों में बड़े स्तर पर ‘मेगा पीटीएम’ (Parent-Teacher Meeting) का आयोजन किया जाने लगा है। इसके जरिए 19,000 से अधिक स्कूलों के लाखों अभिभावकों को स्कूल से सीधे जोड़ा गया है, जिससे अब सरकारी स्कूल लोगों की आखिरी मजबूरी नहीं बल्कि पहली पसंद बन रहे हैं।

शिक्षकों का प्रशिक्षण और नई नीतियां

पंजाब सरकार ने अपने सरकारी स्कूल के प्रिंसिपलों और शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए सिंगापुर और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में भेजा, जिससे उनकी शिक्षण पद्धतियों में बड़ा सुधार आया। भारत सरकार की PGI रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों के समर्पण और पारदर्शी ट्रांसफर/नियुक्ति नीतियों ने व्यवस्था को मजबूत बनाया है।

राजनीति नहीं, भविष्य का निर्माण

पंजाब ने सरकारी शिक्षा को राजनीति से दूर कर एक जन आंदोलन बना दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों के छात्रों ने जेईई और नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं, जो दर्शाता है कि सरकारी प्रणाली में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

इंग्लिश एज कार्यक्रम का लाभ

राज्य सरकार ने 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों की भर्ती की है। 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि पंजाब का बच्चा आत्मविश्वास के साथ किसी भी मंच पर खड़ा हो सके।

वैश्विक स्तर की शिक्षा का अनुभव

अब पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चे केवल किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि आधुनिक लैब और डिजिटल तकनीक का अनुभव भी कर रहे हैं। यह वही सपना है जो विकसित देशों की सरकारी शिक्षा को मजबूत बनाता है।

सिर्फ सत्ता में रहना काफी नहीं

कई राज्यों में एक ही सरकार वर्षों से चल रही है, लेकिन पंजाब ने दिखा दिया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के नेतृत्व में लागू किए गए इन बुनियादी और ढांचागत सुधारों का ही नतीजा है कि आज पंजाब का शिक्षा मॉडल पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुका है।

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