पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने गिग वर्कर्स को किया चौका, डिलीवरी सेवाएं 5 घंटे रही ठप

The CSR Journal Magazine
देशभर में महंगाई के बीच गिग वर्कर्स ने शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक कई शहरों में अपनी डिलीवरी सेवाएं ठप कर दी। वर्कर्स का आरोप है कि कंपनियों की कमाई बढ़ रही है लेकिन उनकी आमदनी लगातार घटती जा रही है।

राइड और डिलीवरी भुगतान की मांग

इन वर्कर्स की मांग है कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए उनके भुगतान को बढ़ाना चाहिए। कई वर्कर्स ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि 60 प्रतिशत गिग वर्कर्स ने इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

छोटी दूरी की राइड का हाल

गिग वर्कर्स का कहना है कि पहले छोटी दूरी की राइड पर उन्हें 20 से 40 रुपये मिलते थे, लेकिन अब 35 से 50 रुपये में ही राइड करनी पड़ रही है। डिलीवरी एजेंट्स के लिए भी भुगतान घटाकर 20 से 30 रुपये तक कर दिया गया है।

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्चों का असर

एक गिग वर्कर का कहना है कि वह रोजाना 10 से 14 घंटे काम करता है, लेकिन बढ़ते ईंधन खर्च के कारण उसकी बचत घटती जा रही है। अगर कोई बाइक राइडर रोज 250 से 350 रुपये का पेट्रोल खर्च करता है, तो महीने में यह खर्च 8 से 10 हजार रुपये तक पहुंच जाता है।

आर्थिक दबाव से परेशान

गिग वर्कर्स का कहना है कि पहले जहां उनकी महीने की बचत 15 से 25 हजार रुपये तक होती थी, अब यह 500 से 700 रुपये रह गई है। बढ़ती महंगाई के कारण उनकी आर्थिक स्थिति में गिरावट आई है, जो काम को जारी रखना मुश्किल बना रहा है।

इंसेंटिव और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत

वर्कर्स की मुख्य मांगों में प्रति राइड और प्रति डिलीवरी भुगतान बढ़ाना, पेट्रोल-डीजल की कीमतों के अनुसार फ्यूल अलाउंस देना, इंसेंटिव स्ट्रक्चर को पारदर्शी बनाना, और लंबी अवधि तक काम करने वाले वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा और बीमा की बेहतर सुविधा शामिल हैं।

सरकार को संदेश पहुँचाने का प्रयास

एक वकील का कहना है कि गिग वर्कर्स को मुख्यधारा में नहीं जोड़ा गया है। उनका कहना है कि इस तरह का 5 घंटे का विरोध प्रदर्शन सरकार तक एक मजबूत संदेश पहुँचाता है। अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में भारत में गिग वर्कर्स की स्थिति में सुधार की आवश्यकता है।

राइडर्स की चिंता

गिग वर्कर्स का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो राइडर्स और डिलीवरी एजेंट्स के काम में कमी आ सकती है। इससे ग्राहकों को डिलीवरी सेवाओं के लिए अधिक समय इंतजार करना पड़ सकता है।

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