पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का प्रमाण! फिर पासपोर्ट का असली मतलब क्या है?

The CSR Journal Magazine
भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है जिसमें कहा गया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, बल्कि एक यात्रा दस्तावेज है। इस बयान में बताया गया कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है और यह एक यात्रा के लिए आवश्यक है। मंत्रालय ने इसे 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस पर स्पष्ट किया। सरकार के सूत्रों का मानना है कि यह कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि यह इतिहास और कानून दोनों से जुड़ा हुआ है।

कानूनी तथ्य जो पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं मानते

कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 कहती है कि केंद्र सरकार कुछ स्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। यह बात इस पर जोर देती है कि पासपोर्ट का होना नागरिकता की पहचान नहीं है। पासपोर्ट अधिकारियों को आवेदन की पूर्ण जांच-पड़ताल करने के बाद ही पासपोर्ट जारी करना होता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवेदक भारतीय नागरिक है।

बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

अगस्त 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में निर्णय दिया था जिसमें जस्टिस अमित बोरकर ने कहा था कि केवल आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी जैसे दस्तावेज नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकते। यह चुनौती उस व्यक्ति के लिए थी जिसका आरोप था कि वह बांग्लादेशी नागरिक है, और अदालत ने इसपर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

1969 का के.एल. मोदी मामला

इस विषय पर 1969 में के.एल. मोदी बनाम भारत संघ मामला भी महत्वपूर्ण है। इस मामले में एक व्यक्ति ने सिंगापुर के पासपोर्ट पर व्यापार किया और उसके लौटने पर उसे विदेशी मानकर डिपोर्ट कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश का पासपोर्ट लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है।

नागरिकता का सही प्रमाण क्या है?

विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा का प्रबंध करना है और यह नागरिकता का सबूत नहीं है। नागरिकता साबित करने के लिए किसी एक दस्तावेज का होना जरूरी नहीं है। भारत में ऐसा कोई “यूनिवर्सल सिटिजनशिप सर्टिफिकेट” नहीं है। नागरिकता मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निर्धारित होती है, और इसके तहत नागरिकता साबित करने के लिए कई दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं, लेकिन कोई एक दस्तावेज नहीं।

नागरिकता अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण दस्तावेज

भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए नागरिकता का प्रमाण पत्र ही एकमात्र दस्तावेज है, लेकिन इसका होना केवल उन्हीं लोगों के पास होता है जिन्होंने नागरिकता हासिल की है। भारत के अधिकांश लोग जन्म से नागरिक होते हैं और उनके पास नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं होता। जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज नागरिकता साबित करने के लिए सहायक हो सकते हैं।

वास्तविकता जो नागरिकता साबित करती है

इस प्रकार भारत में नागरिकता का कोई एक प्रमाण नहीं है, बल्कि यह कई दस्तावेजों के माध्यम से साबित की जाती है। सरकार का स्पष्ट रुख इस मुद्दे को जटिल बनाता है और नागरिकता को साबित करने के लिए आवश्यक कागजात की अंतिम सूची अभी भी अंतिम रूप में नहीं आई है।

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