Asaduddin Owaisi बोले- नमाज और अजान के मुद्दों का हो रहा राजनीतिकरण

The CSR Journal Magazine
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को हैदराबाद में आयोजित ईद मिलाप कार्यक्रम में कहा कि नमाज और अजान से जुड़े मुद्दे जानबूझकर मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए उठाए जाते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करना एक सुनियोजित रणनीति है, जिसका उद्देश्य धार्मिक सेक्टर के विभाजन को बढ़ावा देना है।

सड़क पर नमाज का मसला

ओवैसी ने इस बात पर जोर दिया कि सड़क पर नमाज केवल जुमे और ईद के अवसर पर होती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से दिल्ली तक होने वाली धार्मिक यात्राओं के दौरान जब सड़कें बंद होती हैं और टेंट लगाए जाते हैं, तो उस पर कोई विवाद नहीं होता। यह उनके लिए तुष्टीकरण का एक बड़ा उदाहरण है।

त्योहारों के दौरान प्रतिबंधों पर सवाल

ओवैसी ने हिंदू त्योहारों पर मांस, अंडे और चिकन की बिक्री पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी त्योहार के दौरान मांस की दुकानें बंद कराई जाती हैं, तो रमजान के दौरान शराब की दुकानें भी बंद की जानी चाहिए। यह विचारधारा उनके अनुसार एक समानता की आवश्यकता दर्शाती है।

हिजाब पहनने वाली बेटियां भी प्रधानमंत्री बनेंगी

ओवैसी ने एक और महत्वपूर्ण बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटियां भारत की प्रधानमंत्री बनेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो राजनीतिक दल आज मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, उनकी दुकान अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाली।

सोलापुर में हुई जनसभा

महाराष्ट्र के सोलापुर में आयोजित जनसभा में ओवैसी ने स्पष्ट किया कि यह बयान केवल आज की स्थिति का नहीं, बल्कि भविष्य का भी है। उनके अनुसार, आने वाले समय में समाज में समानता और भाईचारे की भावना बढ़ेगी।

सामाजिक समरसता की आवश्यकता

ओवैसी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।

भाषा और संस्कृति का संरक्षण

उनका कहना था कि भारत की विविधता ही इसकी ताकत है। विभिन्न धर्म और संस्कृति का सम्मान करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से कहा कि हम सबको मिलकर एक सकारात्मक बदलाव लाना होगा।

आवाज उठाने की जरूरत

ओवैसी ने लोगों से आग्रह किया कि वे समाज में हो रहे अन्याय और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि सभी को अपने हक के लिए लड़ने की जरूरत है और यही सच में लोकतंत्र की पहचान है।

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