पटना में प्रदर्शन के बाद बवाल: NEET प्रदर्शन की हिंसा में कई ज़िंदगियां दांव पर

The CSR Journal Magazine

पटना हिंसा के जख्म: NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन में घायल छात्रों, युवकों और अधिकारियों का अस्पतालों में इलाज, BDO की हुई ब्रेन सर्जरी

बिहार की राजधानी पटना में 22 और 25 जुलाई को NEET पेपर लीक के विरोध में हुए उग्र प्रदर्शनों और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद कई छात्र, आम नागरिक तथा पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। विभिन्न अस्पतालों में भर्ती घायलों में एक 15 वर्षीय किशोर, सेना भर्ती की तैयारी कर रहा युवक, जन्मदिन का केक लेकर लौट रहा एक युवक तथा दो प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) भी शामिल हैं। सबसे गंभीर रूप से घायल छपरा के रिविलगंज प्रखंड के बीडीओ रितेश कुमार हैं, जिनके सिर में गंभीर चोट लगने के बाद डॉक्टरों को आपातकालीन ब्रेन सर्जरी करनी पड़ी।

NEET पेपर लीक विरोध बना हिंसक

 पटना में हुए विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत छात्रों की उन मांगों से हुई, जिनमें कथित NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुख रही। प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र हो गया और कई स्थानों पर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच पथराव, लाठीचार्ज और झड़पें हुईं। कई सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। प्रशासन ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

BDO रितेश कुमार की हालत सबसे गंभीर

घायलों में सबसे अधिक चिंता का विषय रिविलगंज प्रखंड के बीडीओ रितेश कुमार की स्थिति है। प्रदर्शन के दौरान उनके सिर पर गंभीर चोट लगी, जिसके कारण उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उनके मस्तिष्क में रक्तस्राव और गंभीर चोट की आशंका जताते हुए आपातकालीन ब्रेन सर्जरी की। अस्पताल सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन सफल रहा है, लेकिन अभी भी उनकी हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

अस्पतालों में चल रहा घायलों का इलाज

घायलों का उपचार राजधानी पटना के प्रमुख अस्पतालों, जयप्रभा मेदांता, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) तथा पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों को सिर, हाथ-पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। कुछ मरीजों की हालत स्थिर है, जबकि कुछ को अभी भी गहन चिकित्सा की आवश्यकता है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि घायलों में ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनका प्रदर्शन से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। इनमें एक युवक, जो अपने जन्मदिन का केक लेकर घर लौट रहा था, हिंसा की चपेट में आ गया। इसी तरह सेना भर्ती की तैयारी कर रहा एक युवक भी झड़प के दौरान घायल हो गया। एक 15 वर्षीय किशोर भी गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचा, जिसका इलाज जारी है।

प्रदर्शन में आम नागरिक भी बने शिकार

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में राहगीर भी फंस गए। कई लोगों को पथराव और भगदड़ में चोटें आईं। व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि अचानक स्थिति बिगड़ने से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भी लगी चोटें

प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी घायल हुए। पथराव में अनेक जवानों के सिर और शरीर पर चोटें आईं। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस और अधिकारियों पर हमला किया गया, जबकि प्रदर्शनकारी पक्ष पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

22 जुलाई से शुरू हुआ तनाव 25 जुलाई को और बढ़ा

22 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पहली बार तनाव की स्थिति बनी थी। इसके बाद 25 जुलाई को बिहार बंद और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जिलों में झड़पें हुईं। पटना, छपरा, सिवान और औरंगाबाद सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया। कई जगहों पर पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान और पुलिस कार्रवाई की घटनाएं सामने आईं।

जांच और कार्रवाई जारी

पुलिस ने हिंसा के मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी फुटेज, वीडियो तथा सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं छात्र संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया गया और कई निर्दोष छात्रों को भी हिरासत में लिया गया।

राजनीतिक बहस भी तेज

पटना की हिंसा के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष राज्य सरकार पर छात्रों के साथ कठोर व्यवहार का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक थी। इस बीच घायल छात्रों, आम नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है। विशेष रूप से बीडीओ रितेश कुमार की गंभीर स्थिति ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और अगले कुछ दिन उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। वहीं अन्य घायलों के उपचार के साथ-साथ प्रशासन हिंसा की पूरी घटना की जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान में जुटा हुआ है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections.
Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast,
crisp, clean updates!
Google Play Store –

Latest News

Popular Videos