1500 किमी रेंज वाली नई ब्रह्मोस मिसाइल: चीन और पाकिस्तान के लिए नई चुनौती

The CSR Journal Magazine

चीन-पाकिस्तान सावधान! भारत बना रहा है 1500 किमी रेंज वाली सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल

भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) आधिकारिक तौर पर 1500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले ब्रह्मोस मिसाइल वेरिएंट को विकसित करने के अपने रोडमैप पर काम कर रहा है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और प्रबंध निदेशक डॉ. जयतीर्थ जोशी ने पुष्टि की है कि यह लंबी दूरी का वेरिएंट भारत की ‘डीप स्ट्राइक’ (गहरे हमले) की रणनीतिक क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देगा।

पाकिस्तान और चीन में जग़ह-जग़ह खलबली

भारत अब 1500 किलोमीटर तक मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल विकसित कर रहा है। यह नई तकनीक, पाकिस्तान और चीन की सैन्य गतिविधियों का सामना करने के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगी। ब्रह्मोस की गति और ताकत इसे दुश्मनों के एयर डिफेंस को तोड़ने में सक्षम बनाएगी। पूर्वी लद्दाख से लेकर हिंद महासागर तक की रणनीति को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने इस बेहतरीन हथियार का निर्माण शुरू किया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी इस नए वर्जन पर काम कर रही है, जो चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों का सामना कर सकेगा।

सामरिक ताकत का नया आयाम

1500 किलोमीटर की नई रेंज भारत को दुश्मन की सीमाओं पर गहराई से हमला करने की क्षमता देगी। यह तकनीक भारत के दोनों पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएगी। भारतीय वायुसेना, अपने सुखोई-30 MKI फाइटर जेट्स के जरिए चीन के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकेगी।

चीन की चालबाज़ियों का प्रभावी जवाब

चीन के तिब्बत में बने एयरबेस और शिनजियांग के मिसाइल लॉन्च पैड, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास ही हैं, अब भारत की मिसाइलों की जद में आ जाएंगे। 1500 किलोमीटर की सीमा वाले नए वर्जन से भारत, अपने हवाई क्षेत्र में रहते हुए, सीधे झटके दे सकेगा।

पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र कमजोर होगा

इस नई मारक क्षमता से पाकिस्तान का पूरा भूगोल भारतीय सेना की जद में आएगा। ग्वादर पोर्ट से लेकर इस्लामाबाद तक, भारतीय युद्धपोत और मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर्स (MAL) पाकिस्तानी ठिकानों तक आसानी से पहुंचेंगे। यह नई तकनीक उनकी आतंकवादी गतिविधियों को धराशायी कर सकती है।

अवरोध को पार करना मुश्किल

ब्रह्मोस अपने साथ Mach 2.8 की रफ्तार बनाए रखेगी, जो ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज है। चीन का एंटी-एयर डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक और इंटरसेप्ट करने में नाकाम रहेगा।

स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग की ताकत

भारत की ये मिसाइलें विदेशी तकनीक से नहीं, बल्कि स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग से विकसित हो रही हैं। 2016 में मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में शामिल होने के बाद भारतीय इंजीनियरों ने पूरी स्वदेशीकरण प्रक्रिया को अपनाया है। इसे हल्का और अधिक प्रभावशाली बनाने में कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मिसाइल विकास का लॉन्ग-रेंज रोडमैप

ब्रह्मोस एयरोस्पेस की भविष्य की दीर्घकालिक योजना के तहत 1500 किमी रेंज वाले इस वेरिएंट को आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। इस मिसाइल के आने के बाद भारतीय सशस्त्र बल सुरक्षित दूरी पर रहते हुए भी दुश्मन की सीमा के भीतर अत्यधिक गहराई में स्थित सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बना सकेंगे। नए वेरिएंट्स के डिजाइन और आधुनिक तकनीकों (जैसे कम्पोजिट मैटेरियल्स) के उपयोग से इसकी निर्माण लागत में लगभग 20% तक की कमी आने की उम्मीद है। इस मिसाइल में भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारतीय बूस्टर और स्वदेशी वॉरहेड (Warhead) का एकीकरण किया जा रहा है।

भारत और चीन के बीच मैन्युफैक्चरिंग की दौड़

अब तक चीन को एशिया का रक्षा मैन्युफैक्चरिंग हब माना जाता था, लेकिन ब्रह्मोस-NG वेरिएंट ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपने सैन्य जरूरतों के लिए ब्रह्मोस का निर्माण कर रहा है और इससे उम्मीद है कि अन्य देशों को भी निर्यात किया जाएगा। इस प्रकार, चीन की समझौतों को उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा।

ब्रह्मोस के अन्य प्रमुख वेरिएंट्स

भारत इस समय अपनी मिसाइल क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए ब्रह्मोस के तीन नए वेरिएंट्स पर समानांतर रूप से काम कर रहा है-
BrahMos-NG (Next Generation): यह मौजूदा मिसाइल से काफी हल्की (लगभग 1.2 टन) और छोटी होगी। इसे सुखोई-30MKI और एलसीए तेजस (LCA Tejas) जैसे हल्के फाइटर जेट्स से आसानी से दागा जा सकेगा। इसमें सटीकता के लिए उन्नत AESA रडार सीकर लगाया जा रहा है।
BrahMos-II (Hypersonic Version): इस हाइपरसोनिक वेरिएंट की गति 5 से 7 मैक (लगभग 7,400 किमी/घंटा से अधिक) होने की उम्मीद है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं मिलेगा।
BrahMos-ER (Extended Range): वर्तमान में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए शामिल किए जा रहे मिसाइल पहले से ही एक्सटेंडेड रेंज वाले हैं, जिनकी मारक क्षमता को बढ़ाकर 450 किमी से 800-900 किमी तक सफलतापूर्वक टेस्ट किया जा चुका है।

चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती क्यों?

यह मिसाइल तकनीक पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए एक बड़ा रणनीतिक सिरदर्द बन रही है। वर्तमान में दुनिया के किसी भी आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम (रूस और अमेरिका के कुछ चुनिंदा सिस्टम को छोड़कर) के लिए सुपरसोनिक गति से आने वाली ब्रह्मोस को रोकना लगभग नामुमकिन माना जाता है। भारत न केवल अपनी सेना के लिए इसे बना रहा है, बल्कि चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों को भी ब्रह्मोस मिसाइलें निर्यात कर रहा है, जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।

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