बालेन शाह सरकार का पहला आर्थिक सर्वेक्षण: नेपाल की अर्थव्यवस्था में बड़ा सुधार या गहराता संकट?

The CSR Journal Magazine

नेपाल का पहला इकोनॉमिक सर्वे: बालेन शाह के पीएम बनने के बाद आए चौंकाने वाले आंकड़े

नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह (बालेंद्र शाह) के नेतृत्व वाली नई सरकार का पहला आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey 2025-26) वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा संसद में पेश कर दिया गया। मार्च 2026 में Gen Z आंदोलन के बाद सत्ता में आए बालेन शाह के कार्यकाल के इस पहले सर्वे में देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े कई चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं।

काठमांडू में नया आर्थिक सर्वे पेश

नेपाल की नई सरकार ने काठमांडू में अपना पहला इकोनॉमिक सर्वे जारी किया है। वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने इस सर्वे की जानकारी देते हुए बताया कि ग्लोबल इकॉनमी की अनिश्चितताओं और मिडिल ईस्ट के संघर्षों के बावजूद नेपाल के आर्थिक संकेतकों में सुधार देखने को मिला है। यह सर्वे नेपाल के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

अर्थव्यवस्था के बढ़ते आंकड़े

इस सर्वे में कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। नेपाल की GDP ग्रोथ रेट में सुधार आयी है, जो कि एक सकारात्मक संकेत है। वैश्विक मंदी और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच नेपाल की आर्थिक विकास दर 3.85% रहने का अनुमान लगाया गया है, जिसे मौजूदा हालातों में सकारात्मक माना जा रहा है। नेपाल की कुल अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 66 खरबा (6.6 ट्रिलियन) नेपाली रुपये तक पहुंच गया है।

प्रति व्यक्ति आय (Par Capita Income)

 देश में प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय बढ़कर 1,535 अमेरिकी डॉलर (USD) होने का अनुमान लगाया गया है पिछले वर्षों की तुलना में अब आर्थिक विकास की रफ्तार तेज हो गई है। यह विकास निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर बना रहा है, जिसमें छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए भी सहूलियतें प्रदान की जाएंगी।

रेमिटेंस (विदेशी धन) में भारी उछाल और विदेशी मुद्रा भंडार

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा देश में आने वाले रेमिटेंस (विदेशों से भेजा जाने वाला धन) का है, जो 37.7% की भारी बढ़त के साथ 14.50 खरबा (1.450 ट्रिलियन) नेपाली रुपये पर पहुंच गया है। यह नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा सहारा साबित हो रहा है। रेमिटेंस में इस उछाल के कारण नेपाल का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (Historic High) पर पहुंच गया है।

बेरोजगारी की स्थिति में सुधार

बेरोजगारी के आंकड़ों में भी आशाजनक बदलाव देखने को मिला है। नई योजनाओं और नीतियों के कारण अब अधिक युवा नौकरियों के लिए अवसर पा रहे हैं। इससे न केवल युवा वर्ग को फायदा होगा, बल्कि देश की समग्र आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। रोजगार सृजन की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की जा रही है।

निवेश में उछाल

अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश की बारिश भी हो रही है। नेपाल में निवेश के लिए सरकार ने कई आकर्षक योजनाएं पेश की हैं। इस सर्वे में उल्लेख किया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है। इससे उद्योग-धंधों के लिए एक नया रास्ता खुला है, जो दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

समाज कल्याण में बढ़ती प्राथमिकता

सरकार ने समाज कल्याण के प्रोजेक्ट्स पर भी ध्यान केंद्रित किया है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में कई योजनाएं बनाई गई हैं। यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि सरकार सामाजिक विकास के प्रति गंभीर है और इसे प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, ऐसे प्रयासों का प्रभाव धीरे-धीरे नजर आएगा।

सेक्टर-वार स्थिति और इंफ्रास्ट्रक्चर

जीडीपी में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 24% है, जबकि गैर-कृषि (सेवा और उद्योग) क्षेत्र की हिस्सेदारी 76% आंकी गई है। हालांकि, औद्योगिक विकास दर (2.9%) और कृषि विकास दर (~3%) में सुस्ती देखी गई है। नेपाल की 99.1% आबादी तक बिजली की पहुंच हो चुकी है। कुल स्थापित क्षमता 4,105 मेगावाट पहुंच गई है और नेपाल ने भारत को 2,918 गीगावाट-घंटे (GWh) बिजली का निर्यात किया है। साल 2025-26 के दौरान नेपाल में लगभग 11.62 लाख विदेशी पर्यटक आए और उनका औसत प्रवास 16.34 दिनों का रहा।

स्थिरता की नई उम्मीद

इकोनॉमिक सर्वे में यह भी बताया गया है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था में स्थिरता की नई उम्मीद जगाई है। विभिन्न चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिससे आम लोगों को भी लाभ होगा। आर्थिक सूचकांक सुधारने के लिए सरकार की संकल्पना ने जनता में विश्वास जगाने का काम किया है।

बढ़ता कर्ज और व्यापार घाटा (चिंताजनक आंकड़े)

देश पर कुल सार्वजनिक कर्ज बढ़कर 28 खरबा 78 अरब (2.878 ट्रिलियन) नेपाली रुपये हो गया है, जो नेपाल की कुल जीडीपी का 43.6% है। नेपाल का व्यापार घाटा 11.2% बढ़कर 10.98 खरबा (1.098 ट्रिलियन) नेपाली रुपये पर पहुंच गया है। देश की अर्थव्यवस्था अभी भी आयात (Imports) पर बहुत अधिक निर्भर है।

बालेन शाह सरकार के अन्य कड़े फैसले

आर्थिक सर्वेक्षण के अलावा, बालेन शाह सरकार अपने कुछ बेहद कड़े और लीक से हटकर लिए गए फैसलों के कारण भी चर्चा में है। सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सहित नेपाल के 7 पूर्व प्रधानमंत्रियों और 100 से अधिक पूर्व मंत्रियों की संपत्तियों की जांच के लिए एक विशेष आयोग का गठन किया है। नेपाल के इतिहास में पहली बार, विदेशी राजदूतों की नियुक्ति के लिए सरकार खुली प्रतियोगिता (Vacancies) निकालने जा रही है ताकि पारदर्शिता लाई जा सके। मंत्रियों और सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है और प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई गई है।

अगले कदम की योजना

बालेन शाह की सरकार ने आर्थिक विकास के लिए अगले कदमों की योजना भी बनाई है। इसमें तकनीकी विकास, उपयुक्त नीतियों का निर्माण और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में लाने की रणनीति शामिल है। यह सर्वेक्षण भविष्य में आर्थिक प्रगति की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर सकता है। इस पहले आर्थिक सर्वेक्षण से साफ है कि बालेन शाह सरकार के आने के बाद विदेशी मुद्रा भंडार और रेमिटेंस के मोर्चे पर नेपाल को बड़ी राहत मिली है, लेकिन भारी सरकारी कर्ज और बढ़ता व्यापार घाटा नई सरकार के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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