ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 बनी मजबूत सहारा, अब व्हाट्सऐप पर भी दर्ज करें शिकायत
देश में ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और विभिन्न सेवाओं के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ उपभोक्ता शिकायतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कई बार ग्राहक खराब उत्पाद मिलने, रिफंड न मिलने, वारंटी का लाभ नहीं मिलने, अधिक कीमत वसूले जाने, भ्रामक विज्ञापन, ऑनलाइन धोखाधड़ी या सेवा प्रदाता द्वारा शिकायतों की अनदेखी जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे मामलों में यदि संबंधित कंपनी या ग्राहक सेवा (Customer Care) समय पर समाधान नहीं देती, तो उपभोक्ताओं के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline – NCH) एक प्रभावी मंच के रूप में कार्य करती है।
जागो ग्राहक जागो अभियान: खरीदारी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए 1915 पर करें संपर्क
भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) द्वारा संचालित राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि खरीदारी के बाद किसी भी प्रकार की समस्या आती है और कंपनी की ग्राहक सेवा शिकायत का समाधान नहीं करती है, तो उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1915 पर कॉल करें या व्हाट्सऐप नंबर 8800001915 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा उपभोक्ता ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
क्या है राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन?
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) उपभोक्ता और कंपनी के बीच विवादों को अदालत जाने से पहले सुलझाने की एक प्री-लिटिगेशन (Pre-Litigation) व्यवस्था है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित और सरल समाधान उपलब्ध कराना है ताकि छोटे-छोटे विवादों के लिए उपभोक्ताओं को उपभोक्ता आयोग का दरवाजा न खटखटाना पड़े। यह हेल्पलाइन देशभर के उपभोक्ताओं के लिए एकल संपर्क केंद्र (Single Point of Access) के रूप में कार्य करती है।
किन मामलों में कर सकते हैं शिकायत?
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के माध्यम से निम्नलिखित मामलों में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है—
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ऑनलाइन शॉपिंग में धोखाधड़ी
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खराब या दोषपूर्ण उत्पाद
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रिफंड या रिप्लेसमेंट न मिलना
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वारंटी या गारंटी से जुड़ी समस्या
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निर्धारित मूल्य (MRP) से अधिक कीमत वसूलना
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भ्रामक विज्ञापन
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सेवा में लापरवाही
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एयरलाइन, रेलवे, होटल, बैंकिंग, बीमा और टेलीकॉम सेवाओं से संबंधित शिकायतें
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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े विवाद
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डिजिटल भुगतान और अन्य उपभोक्ता सेवाओं से संबंधित समस्याएं।
शिकायत दर्ज करने के कई विकल्प
सरकार ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए शिकायत दर्ज करने के अनेक माध्यम उपलब्ध कराए हैं।
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टोल फ्री नंबर 1915
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व्हाट्सऐप नंबर 8800001915
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एसएमएस सेवा
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राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन मोबाइल ऐप
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UMANG ऐप
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ऑनलाइन पोर्टल
यह सेवा प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक उपलब्ध रहती है (राष्ट्रीय अवकाश को छोड़कर)। इसके अतिरिक्त कॉल बैक सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
व्हाट्सऐप से कैसे दर्ज करें शिकायत?
व्हाट्सऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करना बेहद आसान है। सबसे पहले 8800001915 नंबर पर “Hi” या संदेश भेजें। इसके बाद चैटबॉट उपभोक्ता से राज्य, शहर, कंपनी का नाम, शिकायत का प्रकार तथा अन्य आवश्यक जानकारी मांगता है। उपभोक्ता बिल, रसीद, ऑर्डर विवरण, भुगतान का प्रमाण और अन्य संबंधित दस्तावेज भी अपलोड कर सकता है। सभी विवरण जमा होने के बाद शिकायत का एक डॉकेट नंबर (Docket Number) जारी किया जाता है, जिसके माध्यम से शिकायत की प्रगति पर नजर रखी जा सकती है।
17 भाषाओं में उपलब्ध सेवा
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां देशभर के उपभोक्ता 17 भारतीय भाषाओं में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी अपनी भाषा में सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
अदालत जाने से पहले समाधान की कोशिश
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन उपभोक्ता और संबंधित कंपनी के बीच संवाद स्थापित कर विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास करती है। यदि शिकायत का समाधान नहीं होता, तब उपभोक्ता आगे उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) में कानूनी कार्रवाई कर सकता है। इस प्रकार यह व्यवस्था समय, धन और कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं को कम करने में मदद करती है।
कंपनियों की भी बढ़ रही भागीदारी
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के साथ अब एक हजार से अधिक कंपनियां और संस्थाएं जुड़ चुकी हैं। शिकायत दर्ज होने पर संबंधित कंपनी को तत्काल सूचना भेजी जाती है और निर्धारित समय के भीतर जवाब देने की अपेक्षा की जाती है। इससे शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और तेज हुई है।
शिकायत दर्ज करते समय रखें इन बातों का ध्यान
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खरीदारी का बिल या इनवॉइस सुरक्षित रखें।
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ऑर्डर नंबर और भुगतान का प्रमाण संभालकर रखें।
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कंपनी से हुई ई-मेल या चैट का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
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शिकायत करते समय सभी तथ्य स्पष्ट रूप से लिखें।
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गलत या अधूरी जानकारी देने से बचें।

