‘1 रुपए किलो प्याज मंजूर नहीं!’ नासिक में किसानों का चक्का जाम, 2400 रुपए MSP की मांग

The CSR Journal Magazine

प्याज किसानों का हल्ला-बोल: लागत ₹20/kg, भाव मात्र ₹1.25/kg!

महाराष्ट्र के नासिक जिले के चांदवड़ में प्याज उत्पादक किसानों ने गिरते दामों के खिलाफ मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-3) को जाम कर एक बड़ा आंदोलन (विराट क्रांती महामोर्चा) किया है। यह विरोध प्रदर्शन 26 मई 2026 को मुख्य रूप से विपक्ष महाविकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं और स्थानीय किसान संगठनों के नेतृत्व में किया गया। किसानों का आरोप है कि मंडियों में प्याज की थोक कीमतें बेहद कम (कुछ जगहों पर ₹1 से ₹1.25 प्रति किलो तक) हो गई हैं, जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।

नासिक में किसानों का सड़क पर भारी प्रदर्शन

नासिक जिले के चांदवड चौराहे पर आज हजारों किसानों ने मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि किसानों को प्याज की बिक्री से भारी नुकसान हो रहा है। वर्तमान में उनकी फसल की मात्रा और लागत को देखे तो किसान अपनी प्याज ₹20 प्रति किलो की लागत में उगा रहे हैं, जबकि उन्हें बिक्री के समय सिर्फ ₹1.25 प्रति किलो मिल रहा है। ऐसे में उनकी आजीविका पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।

किसानों की मांगें: MSP और सब्सिडी

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कम से कम ₹24 प्रति किलो होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने पुरानी फसल पर ₹15 प्रति किलो की सब्सिडी भी मांगी है। किसान यह समझते हैं कि ऐसे फैसले उनके लिए आवश्यक हैं ताकि वे अपने जीवन यापन को सुरक्षित कर सकें।

अपर्याप्त सरकारी खरीद मूल्य

सरकार ने प्याज के लिए ₹1,580 प्रति क्विंटल (या कुछ घोषणाओं के अनुसार ₹1,235) का खरीद मूल्य तय किया है, जिसे किसानों ने बहुत कम और “जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा” बताया है। किसानों और आंदोलनकारी नेताओं की मुख्य मांग है कि प्याज का न्यूनतम मूल्य कम से कम ₹2,400 से ₹2,500 प्रति क्विंटल (या ₹24 प्रति किलोग्राम) तय किया जाए। किसान संगठन प्याज निर्यात को हमेशा के लिए खुला रखने और प्रति क्विंटल ₹1,500 की सब्सिडी देने की मांग कर रहे हैं।

हाईवे पर लगा जाम: गाड़ियों की लंबी कतारें

इस प्रदर्शन के चलते मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक पूरी तरह ठप्प हो गया है। लोग घंटों-घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहे। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए बल्कि आम जनजीवन के लिए भी मुश्किलों का कारण बन गई। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग बने रहे।

मौजूदा स्थिति, हाईवे पर चक्का जाम

किसानों ने चांदवड़ में मुंबई-आगरा हाईवे पर गाड़ियाँ रोककर रास्ता रोको आंदोलन किया, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एनसीपी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार, शिवसेना (UBT) के अंबादास दानवे और कांग्रेस के हर्षवर्धन सपकाल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए आपस में और राहगीरों को ‘मेलोडी’ चॉकलेट बांटी।

केंद्र सरकार ने नाफेड और NCCF के माध्यम से नई खरीद नीति लागू की

प्याज की गिरती कीमतों से किसानों को राहत देने और बफर स्टॉक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नाफेड (NAFED) और NCCF के माध्यम से नई खरीद नीति लागू की है। किसानों के भारी विरोध को देखते हुए सरकार ने ऐन वक्त पर अपनी नीति में कुछ बड़े बदलाव भी किए हैं। इस नई खरीद नीति के तहत किसानों के आंदोलन के दबाव में उपभोक्ता मामलों के विभाग (DoCA) ने न्यूनतम आश्वासन खरीद मूल्य (MAPP) को ₹1,235 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹1,580 प्रति क्विंटल (₹15.80/किलो) कर दिया है।

खरीद का लक्ष्य और समय

इस रबी सीजन के लिए कुल 2 लाख टन (2 लाख क्विंटल) प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। इस कुल लक्ष्य में से नाफेड (NAFED) 1 लाख टन और NCCF 1 लाख टन प्याज की खरीद करेंगे, आम तौर पर जुलाई में शुरू होने वाली यह खरीद प्रक्रिया इस बार बाजार में गिरावट को रोकने के लिए समय से पहले अप्रैल-मई में ही शुरू कर दी गई है।

डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था e-Samridhi पोर्टल

नाफेड के माध्यम से प्याज बेचने के लिए किसानों का पंजीकरण और भुगतान पूरी तरह डिजिटल e-Samridhi पोर्टल के जरिए किया जा रहा है ताकि बिचौलियों को खत्म किया जा सके। खरीदी गई उपज का पैसा बिना किसी देरी के सीधे किसानों के बैंक खातों (DBT) में भेजा जा रहा है। सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (CWC) ने खरीद केंद्रों के करीब ही 2 लाख टन से अधिक क्षमता के गोदामों की पहचान की है ताकि प्याज खराब न हो।

किसानों का असंतोष

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अनुसार, प्याज की उत्पादन लागत ही लगभग ₹1,800 प्रति क्विंटल है, इसलिए वे अभी भी ₹3,000 प्रति क्विंटल की खरीद दर की मांग पर अड़े हैं। किसान बताते हैं कि पिछले कई वर्षों से उन्हें प्याज की कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। लागत बढ़ने के बावजूद उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहा है। इस दौरान कई किसान अपनी फसल बेचने पर मजबूर भी हुए हैं। उनके संघर्ष और हौसले ने इस आंदोलन को और भी मजबूत बना दिया है।

आंदोलन का बढ़ता प्रभाव

इस प्रदर्शन का असर न केवल नासिक बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है। किसान संघों के सहयोग से यह आंदोलन और भी ताकतवर बनता जा रहा है। यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो यह आंदोलन आगे बढ़ सकता है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। जनसंख्या के एक बड़े हिस्से की नजर इस पर बनी हुई है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

किसानों ने सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है और ताबड़तोड़ जवाब की आस भी रखी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाएगी या किसान इसी तरह से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। हाल के घटनाक्रम इस बात को स्पष्ट करते हैं कि अब किसान अपनी आवाज को सुनाने के लिए तैयार हैं।

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