मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कारोबार ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने पहली बार EBITDA स्तर पर सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया है। इसका मतलब है कि परिचालन स्तर पर कारोबार अब ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां वह अपने संचालन खर्चों को संतुलित करने में सक्षम है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में सप्लाई चेन मजबूत होने और बिक्री का दायरा बढ़ने के साथ मुनाफे में और सुधार देखने को मिलेगा।
मार्केट शेयर बढ़ाने पर कंपनी का पूरा जोर
रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) के तहत संचालित यह कारोबार फिलहाल देश के FMCG बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केतन मोदी के अनुसार मौजूदा रणनीति का उद्देश्य अल्पकालिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे वितरण नेटवर्क और सप्लाई चेन का विस्तार होगा, परिचालन लाभप्रदता में भी लगातार सुधार आएगा।
FY 2030 तक बड़ा लक्ष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश
कंपनी ने वित्त वर्ष 2030 तक अपने FMCG कारोबार को एक लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए रिलायंस सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। कुल 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश में से लगभग 10,000 करोड़ रुपये पहले ही लगाए जा चुके हैं। कंपनी का मानना है कि मजबूत उत्पादन क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक्स भविष्य में तेज विकास की नींव तैयार करेंगे।
रेवेन्यू में तेज बढ़ोतरी, लेकिन निवेश का असर जारी
रिलायंस के अनुसार हालिया तिमाही में उसके FMCG कारोबार का ग्रॉस रेवेन्यू बढ़कर 8,600 करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो पिछले स्तर की तुलना में दोगुने से ज्यादा है। हालांकि कंपनी ने इस अवधि के EBITDA और शुद्ध लाभ के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए। वहीं, मार्च 2026 तक की पहली रिपोर्टिंग अवधि में RCPL ने 125 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया था, जिसे कंपनी शुरुआती विस्तार और निवेश का स्वाभाविक प्रभाव मान रही है।
ई-कॉमर्स और डार्क स्टोर्स पर भी बढ़ेगा फोकस
रिलायंस रिटेल अगले कुछ महीनों में अपने डार्क स्टोर्स के नेटवर्क का विस्तार करने की योजना पर काम कर रही है ताकि ग्राहकों तक तेज डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके। कंपनी का कहना है कि ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स में किए जा रहे निवेश का अल्पकाल में मार्जिन पर असर पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में यही रणनीति विकास को गति देगी। पिछले कुछ तिमाहियों में ऑनलाइन ऑर्डर वॉल्यूम में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रॉसरी और फैशन श्रेणी में भी ऑनलाइन बिक्री का योगदान लगातार बढ़ रहा है, जिससे कंपनी को भविष्य में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।