शिंदे गुट का बड़ा दावा: UBT के 7 सांसद संपर्क में, उद्धव ठाकरे का कड़ा रुख: ‘जो जाना चाहता है जाए’
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है, जहाँ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे (Shiv Sena UBT) के 9 में से 7 सांसद उनके संपर्क में हैं और वे आगामी मानसून सत्र से पहले पाला बदल सकते हैं। इस संभावित दलबदल की रणनीति को शिंदे खेमे की ओर से ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया है, जो अपने अंतिम चरण में बताया जा रहा है।
उद्धव ठाकरे का स्पष्ट संदेश
शिवसेना (शिंदे गुट) के MLC कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं। ANI के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत पिछले एक महीने से चर्चा चल रही है। यह प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। यह सांसद मानसून सत्र से पहले शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।
शिंदे गुट का दावा और ऑपरेशन टाइगर
शिंदे गुट के पूर्व सांसद कृपाल तुमाने और अन्य नेताओं के अनुसार, बातचीत पिछले कई हफ्तों से चल रही थी जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि 7 जून को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के आवास पर शिंदे और यूबीटी के कुछ सांसदों के बीच गुप्त बातचीत हुई थी। दल बदलने वाले सांसदों को आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में जगह और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने का भरोसा दिया गया है।
उद्धव ठाकरे की मातोश्री में आपातकालीन बैठक
टूट की इन खबरों और अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने निवास ‘मातोश्री’ पर पार्टी सांसदों और विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई। बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “जो कोई भी पार्टी छोड़ना चाहता है, वह जाने के लिए स्वतंत्र है। मैं किसी को जबरदस्ती नहीं रोकूंगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि संकट के समय पार्टी छोड़ने वालों को भविष्य में पछताना पड़ेगा। यूबीटी नेता संजय राउत ने पार्टी टूट के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारी संसदीय पार्टी पूरी तरह एकजुट और मजबूत है।
सांसदों के बीच उठे सवाल
यवतमाल-वाशिम से UBT सांसद संजय देशमुख ने केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से दिल्ली में मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर संजय देशमुख का उपस्थित नहीं होना सवालों के घेरे में है। संजय राउत ने इस मुलाकात को लेकर गलत जानकारी पेश होने का दावा किया है और कहा है कि सभी UBT सांसद पार्टी के साथ खड़े हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि हम सब शेर हैं और हम ‘ऑपरेशन वुल्फ’ शुरू करेंगे।
राहुल नार्वेकर का निर्णय
संजय राउत ने यह भी कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी सांसद एकजुट हैं और शिंदे गुट के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि चार दिन पहले उद्धव ठाकरे की बैठक में सभी सांसद शामिल हुए थे और उन्होंने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया था। यहाँ तक कि कुछ नेताओं ने परिजनों की कसम खाकर उद्धव ठाकरे के साथ रहने की बात कही थी।
महाराष्ट्र की राजनीति में उठा तूफान
यह घटनाक्रम वर्ष 2022 में शिवसेना में हुई ऐतिहासिक बगावत की याद दिलाता है। यदि शिंदे गुट का यह दावा सच साबित होता है, तो आगामी चुनावों और मानसून सत्र से पहले महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन और उद्धव ठाकरे के लिए यह एक और बड़ा विधायी झटका होगा। 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे। उस समय उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट के लिए कहा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई। अंततः उद्धव ने इस्तीफा दे दिया।
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
30 जून 2022 को शिंदे ने भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री का पद संभाला। इसके बाद दोनों गुटों ने एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि बगावत के समय शिंदे गुट में 37 विधायक थे, इसीलिए उन्हें असली शिवसेना माना गया। चुनाव आयोग ने भी शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को सौंप दिया है।
भविष्य में क्या होगा?
राजनीति में ध्रुवीकरण और टूट-फूट का ये सिला कहीं और ना बढ़े, ये देखना होगा। UBT और शिंदे गुट के बीच जो हालात बन रहे हैं, वो राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देते हैं। महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना गठबंधन की स्थिति इन सब चीजों पर गहरी नजर रख रही है।
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