महाराष्ट्र सरकार ने अन्ना हजारे की भूख हड़ताल से पहले RTI नियमों में बदलाव पर रोक लगाने का निर्णय लिया।

The CSR Journal Magazine

अन्ना हजारे के भूख हड़ताल से पहले महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, RTI नियमों में बदलाव पर लगाई रोक

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी के आगे झुकते हुए महाराष्ट्र सरकार ने विवादित ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026’ पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नए आरटीआई (RTI) नियमों को फिलहाल स्थगित करने का आदेश दिया है। इसके बाद राज्य में 11 जून, 2026 से पहले वाली पुरानी स्थिति बहाल हो जाएगी।

CM फडणवीस का अहम कदम

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद, सूचना का अधिकार (RTI) नियमों में किए गए विवादित बदलावों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। हजारे ने कहा था कि नए नियमों के कारण जनता को जानकारी पाने में कठिनाई होगी, जिससे जवाबदेही कमजोर होगी।

अन्ना हजारे की नाराजगी

अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाया कि नए नियम बिना जन-संवाद के बनाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नए संशोधन RTI एक्ट की मूल भावना को कमजोर कर रहे हैं। अगर सरकार ने इन नियमों को तुरंत वापस नहीं लिया, तो हजारे ने 5 जुलाई से भूख हड़ताल की धमकी दी थी।

RTI नियमों में क्या बदलाव हुए हैं?

महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026 में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव किया गया था। इसमें शामिल है कि अब आवेदकों को 730 रुपये की आवेदन फीस देनी होगी और केवल एक ही विषय पर जानकारी मांगी जा सकेगी। इसके अलावा, शब्दों की सीमा 150 शब्दों तक सीमित कर दी गई है। इन बदलावों से नागरिकों की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

फडणवीस का आदेश

मुख्यमंत्री फडणवीस ने RTI के मुख्य आयुक्त को निर्देश दिया है कि नए नियमों पर तुरंत रोक लगाई जाए। यह निर्णय हजारे की चेतावनी के बाद आया है और इससे राज्य सरकार की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। फडणवीस ने इस मामले को गम्भीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई की है।

नवीनतम बदलावों से प्रक्रिया में बाधा

अन्ना हजारे ने यह चिंता व्यक्त की थी कि नए नियमों से सरकारी जानकारी की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह बदलाव न केवल आम नागरिकों के लिए, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी समस्याएँ पैदा करेगा। उनकी मांग है कि नई नियमों को वापस लिया जाए और इस पर समाज के विभिन्न हिस्सों से परामर्श किया जाए।

नए RTI नियमों के वे विवादित प्रावधान जिन पर रोक लगी

महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 जून को अधिसूचित किए गए नए नियमों में कई कड़े बदलाव प्रस्तावित थे-
आवेदन शुल्क में बढ़ोतरी: RTI आवेदन फीस ₹10 से बढ़ाकर ₹30 की गई थी।
दस्तावेजों का बढ़ा हुआ खर्च: प्रति पेज फोटोकॉपी का चार्ज ₹2 से बढ़ाकर ₹5 और डिजिटल कॉपियों के लिए भी ₹5 प्रति पेज तय किया गया था।
पहचान पत्र की अनिवार्यता: आवेदकों के लिए अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने वाला स्व-सत्यापित फोटो आईडी (Photo ID) अपलोड करना अनिवार्य किया गया था, जिससे व्हिसलब्लोअर्स की जान को खतरा बताया जा रहा था।
शब्द और विषय सीमा: एक आवेदन में केवल एक ही विषय और अधिकतम 150 शब्दों की सीमा तय की गई थी।
अपील फीस: प्रथम अपील के लिए ₹50 और दूसरी अपील के लिए ₹100 का शुल्क तय किया गया था।
बीपीएल छूट पर कैप: गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले नागरिकों को पहले मुफ्त जानकारी मिलती थी, लेकिन नए नियम में सिर्फ पहले 50 पेज ही मुफ्त देने का नियम था

जनता की आवाज को सुनने की आवश्यकता

हजारे ने सरकार से अपील की है कि वह RTI एक्सपर्ट, सूचना आयुक्तों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सुझाव ले। उनका कहना है कि सरकार को जनता की आवाज को सुनने की आवश्यकता है। इस प्रकार की सहभागिता से ही सही और पारदर्शी नियम बनाए जा सकते हैं।

RTI एक्ट की असली भावना

RTI एक्ट की स्थापना नागरिकों को सरकारी जानकारी हासिल करने के लिए एक मजबूत प्लेटफार्म प्रदान करने के लिए की गई थी। हालिया बदलावों के कारण इस एक्ट की वास्तविक भावना को खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में अन्ना हजारे जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांगों को गंभीरता से सुनना बेहद जरूरी है।

क्या होगी आगे की दिशा?

फडणवीस सरकार का यह निर्णय दर्शाता है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझते हैं। अब देखना होगा कि क्या सरकार अपने इस निर्णय को बनाए रखेगी और क्या अन्ना हजारे की भूख हड़ताल की जरूरत पड़ेगी। आगामी दिन महाराष्ट्र के लिए इस मुद्दे के समाधान के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे।

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