क्या लिव-इन में रहने पर पुलिस गिरफ्तार करेगी? UCC के मसौदे पर CM Mohan Yadav का बड़ा बयान

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को कटनी में बयान दिया कि अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम कई क्यों करें? उनका इशारा बहुविवाह को खत्म करने की ओर था। इस बयान के बाद, राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर चर्चा तेज हो गई है। आज भोपाल के जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। UCC का क्या परिणाम होगा, यह जानने के लिए लोग उत्सुक हैं।

UCC का मध्य प्रदेश मॉडल

कई लोग जानना चाहते हैं कि मध्य प्रदेश का UCC मॉडल उत्तराखंड से कैसे अलग है। सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश का ड्राफ्ट उत्तराखंड मॉडल पर आधारित है। इसका श्रेय सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को जाता है, जिन्होंने इसे तैयार किया है। हालांकि, मध्य प्रदेश में कुछ जरूरी बदलाव भी किए गए हैं।

लिव-इन गलियों में कानून

एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या लिव-इन में रहने पर पुलिस गिरफ्तारी कर सकेगी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारियाँ यूंही नहीं होंगी। प्रस्ताव के अनुसार, हर लिव-इन कपल को अपने इलाके के डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी होगा। रजिस्ट्रेशन होने पर, माता-पिता और पुलिस को सूचना दी जाएगी।

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और उसके परिणाम

रजिस्ट्रेशन न कराने पर विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। पड़ोसी या मकान मालिक शिकायत कर सकते हैं। अगर कोई कपल बिना रजिस्ट्रेशन के रह रहा है, तो उन्हें 3 महीने की जेल हो सकती है। इसके अलावा, पुरुष को लिव-इन पार्टनर को छोड़ने की स्थिति में भरण-पोषण देना भी होगा। इस रजिस्ट्रेशन से लिव-इन कपल के बच्चों को कानूनी पहचान भी मिलेगी।

लिव-इन के बच्चों के अधिकार

UCC लागू होने के बाद, लिव-इन से जन्मे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में अधिकार मिलेगा। उनके लिए कानूनी पहचान की व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें समाज में अवैध और नाजायज नहीं माना जाएगा। इससे बच्चे की कस्टडी और भरण-पोषण के नियम भी साफ होंगे।

परंपराएं और UCC

एक अन्य सवाल यह है कि क्या UCC लागू होने से हिंदू विवाह जैसे परंपरीक संस्कार खत्म होंगे। इस पर सीएम ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है। UCC किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। इसके अंतर्गत सभी समुदायों को समान अधिकार मिलेंगे।

संपत्ति में अधिकार

UCC के तहत, बेटियों को संपत्ति में अधिकार देने के लिए एक महत्वपूर्ण संशोधन भी प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत माता-पिता दोनों का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा। इससे बेटियों को भी बेटों के समान संपत्ति पर अधिकार मिल सकेगा।

कौन-कौन धर्म इस कानून से बाहर?

कमेटी ने अनुसूचित जनजातियों के साथ घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। यह कदम उनके विशेष अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है।

समाज से सुझाव और तैयारी

UCC का मसौदा तैयार करने से पहले राज्य स्तरीय समिति

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos