Kerala के Sabarimala गोल्ड केस में पूर्व TDB प्रमुख के खिलाफ मिला महत्वपूर्ण सबूत

The CSR Journal Magazine
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हुए गोल्ड चोरी मामले में एसआईटी ने हाल ही में पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अध्यक्ष पीएस प्रशांत के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत मिलने का दावा किया है। जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड के कई सदस्यों की भूमिका संदिग्ध है। एसआईटी ने अदालत को सूचित किया है कि यह मामला आपराधिक धोखेबाजी, जालसाजी और साजिश से भरा हुआ है।

अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी

हाईकोर्ट के जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने एसआईटी को नया मामला दर्ज करने की अनुमति दी है। यदि आवश्यक हुआ, तो एसआईटी 2025 की गोल्ड प्लेटिंग के मामले में अलग से भी केस दर्ज कर सकती है, या फिर इस जांच के निष्कर्षों को 2019 में हुए सोने की कथित हेराफेरी के मामले में जोड़ सकती है। उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य अधिकारियों और पूर्व बोर्ड सदस्यों की भूमिका की जांच अभी भी जारी है।

सोने की चोरी का पूरा मामला

सबरीमाला मंदिर से जुड़ी इस जांच में आरोप है कि मंदिर की मूर्तियों पर लगे सोने की परत वाले प्लेट्स से सोना निकाला गया और इसे हड़प लिया गया। एसआईटी की जांच में पाया गया कि देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों ने बिना उचित अनुमति के ये प्लेट्स बाहर दीं और इसमें कारोबारी संगठनों की मिलीभगत भी थी।

पूर्व TDB अध्यक्ष ने आरोपों को किया खारिज

पीएस प्रशांत ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को सख्ती से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि 2025 की गोल्ड प्लेटिंग को लेकर कोई सीधा आरोप नहीं है, बल्कि सिर्फ अदालत की अनुमति न लेने की बात की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सोने को गोल्ड प्लेटिंग के लिए भेजने में सभी नियमों का पालन किया गया था।

SIT की जांच में नित नए खुलासे

फिलहाल तक इस केस में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपी मंदिर के पूर्व पुजारी नंबूदरी उन्नीकृष्णन पोट्टी और सोना व्यापारी डी मणि शामिल हैं। इसके साथ ही, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए पद्मकुमार की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी का कहना है कि यह मामला गंभीर लापरवाही और अनधिकृत तरीके से प्लेट्स सौंपने की साजिश को उजागर करता है।

सीबीडीटी की जांच पर बनी नजर

अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच यह देखेगी कि क्या इस प्रक्रिया से ‘अपराध की आय’ बनी है। अगर आवश्यकता पड़ी, तो आरोपियों की संपत्तियों को भी अटैच किया जा सकता है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने इस मामले में TDB बोर्ड के पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गायब संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 500 करोड़ हो सकती है।

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