फाल्गुन मास की आहट के साथ ही काशी की गलियों में फाग की खुशबू घुलने लगी है। बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी एक बार फिर आध्यात्मिक उल्लास में डूबने जा रही है। बाबा के विवाह और रंगभरी एकादशी के उत्सव के बाद अब काशी उस अनोखी परंपरा के साक्षी बनने को तैयार है, जिसे दुनिया “चिता भस्म की होली” के नाम से जानती है।
28 फरवरी को मणिकर्णिका घाट पर होगा अद्भुत आयोजन
रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन, 28 फरवरी शनिवार को, दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली का आयोजन किया जाएगा। यह वही घाट है जहां जीवन और मृत्यु आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं। जलती चिताओं के बीच खेली जाने वाली यह होली काशी की सबसे रहस्यमयी और अलौकिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।
जब बाबा विश्वनाथ अपने गणों संग खेलते हैं मसाने की होली
मान्यता है कि मध्याह्न स्नान के लिए बाबा विश्वनाथ स्वयं मणिकर्णिका तीर्थ पर आते हैं। स्नान के बाद बाबा अपने प्रिय गणों के साथ महामशान पहुंचते हैं और चिता भस्म से होली खेलते हैं। यही वह क्षण होता है जब मृत्यु का भय समाप्त होकर जीवन के शाश्वत सत्य का बोध होता है। इस दृश्य को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से काशी पहुंचते हैं।
दुख के स्थान पर गूंजती है शहनाई, बदल जाता है माहौल
जिस मणिकर्णिका घाट पर आम दिनों में विलाप और अंतिम विदाई का दृश्य दिखाई देता है, उसी घाट पर इस दिन शहनाई की मंगल ध्वनि सुनाई देती है। भूतनाथ की मंगल होरी के साथ वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। भक्तजन भस्म से होली खेलते हुए आध्यात्मिक आनंद में डूब जाते हैं और शिव तत्व से साक्षात्कार करते हैं।
25 वर्षों से परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं गुलशन कपूर
इस अनूठी परंपरा को वर्तमान स्वरूप देने का श्रेय बाबा महाश्मसान नाथ मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर को जाता है। उन्होंने पिछले 25 वर्षों से जन सहयोग के माध्यम से इस आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया है। गुलशन कपूर के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाते हैं और उसी से होली के पर्व का शुभारंभ माना जाता है।
क्यों खास है चिता भस्म की होली?
काशी की इस होली में देव, दानव, मनुष्य, यक्ष-गंधर्व सभी शामिल होते हैं, लेकिन बाबा के वे गण जो आम उत्सवों से दूर रहते हैं — भूत, प्रेत, पिशाच और अदृश्य शक्तियां — इस दिन बाबा के साथ मसाने में होली खेलते हैं। यही कारण है कि यह पर्व संसार में अद्वितीय माना जाता है।
जीवन के सत्य का साक्षात्कार कराती है यह होली
चिता भस्म की होली केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन के अंतिम सत्य की याद दिलाने वाला पर्व है। यह संदेश देता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि शिव में विलय का मार्ग है। इसी अनुभूति के साथ काशी में गूंज उठता है — खेले मसाने में होरी, भूतनाथ की मंगल होरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates
The tragic incident occurred when an 18-year friendship culminated in the murder of Prakash Chandra Gupta, aged 30, by his close associate, Mohit Dwivedi,...