बंगाल चुनाव रिजल्ट के बाद SIR ट्रिब्यूनल से इस्तीफा, जानिए जस्टिस शिवगणनम का सफर

The CSR Journal Magazine
\जस्टिस टी.एस. शिवगणनम ने हाल ही में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने केवल 22 दिनों में 1,777 अपीलों का निपटारा किया और किसी भी अपील को खारिज नहीं किया। उनके अनुसार, कोलकाता में लंबित एक लाख अपीलों के निपटारे में चार साल लग सकते हैं। उनका इस्तीफा कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और चुनाव आयोग को सौंपी गई। इस फैसले के पीछे जस्टिस शिवगणनम के निजी कारण हैं, जो लंबे समय से चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कैसे शुरू हुआ जस्टिस शिवगणनम का सफर?

जस्टिस शिवगणनम की नियुक्ति की शुरुआत उत्तरी 24 परगना और कोलकाता के मामलों से हुई, लेकिन जल्द ही उन्होंने मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम के मामले भी सुने। उनके ट्रिब्यूनल ने फराक्का से कांग्रेस के उम्मीदवार मोहम्मद महताब शेख के मामले को मंजूरी दी, जिसने चुनाव जीतकर विधायक का पद हासिल किया। जस्टिस शिवगणनम ने बताया कि उन्होंने व्यस्तता के बावजूद हर अपील पर खुला मन से विचार किया।

काम करने की अनोखी शैली

जस्टिस शिवगणनम ने बताया कि वे सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक काम करते थे, यहां तक कि रविवार को भी उन्होंने बिना किसी स्टाफ के केस निपटाने का काम किया। उन्होंने Missionaries of Charity की ननों की अपील भी सुनी, और 30 ननों को वोट डालने की अनुमति दी। ऐसा करने में उन्होंने सभी मामलों पर निस्वार्थ विचार किया, भले ही जटिलताएं थीं। उनके अनुसार, अभी भी एक लाख अपीलें लंबित हैं, जो दर्शाती हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में कितना काम बचा है।

जस्टिस शिवगणनम का तकनीकी दृष्टिकोण

जस्टिस शिवगणनम ने बताया कि जज लंबे आदेश देने के आदी होते हैं, लेकिन ई-कोर्ट पर शब्दों की संख्या की सीमा होती है। इसलिए उन्होंने चार से पांच लाइनों में आदेश देना शुरू किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ई-कोर्ट की कार्यवाही का अनुभव है, लेकिन सभी पूर्व जज टेक्नोलॉजी से अवगत नहीं होते। उन्होंने तकनीकी सहायता के महत्व को भी रेखांकित किया।
जस्टिस शिवगणनम की पृष्ठभूमि
जस्टिस टी.एस. शिवगणनम का जन्म 16 सितंबर को हुआ, और उन्होंने अपनी B.Sc. की डिग्री चेन्नई के लोयोला कॉलेज से प्राप्त की। कानून की पढ़ाई मद्रास लॉ कॉलेज से की और तमिलनाडु बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया। उन्होंने साल 2000 में अतिरिक्त केंद्र सरकार स्थायी वकील के रूप में नियुक्ति पाई और इसके बाद कई पदों को संभाला। जस्टिस शिवगणनम को 11 मई 2023 को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई।
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