SIR में नाम कटने के बाद भी आपके अधिकार रहेंगे सुरक्षित, जानें कैसे

The CSR Journal Magazine
विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत देशभर से 6 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट चुके हैं। इस स्थिति में सवाल उठता है कि क्या इसके बाद उनके नागरिक अधिकार भी खत्म हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने का मतलब नागरिकता समाप्त होना नहीं है। जस्टिस बागची ने कहा कि यह अधिकार केवल वोट डालने तक सीमित है।

मौलिक अधिकारों की सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, मौलिक अधिकार जैसे कि जीवन, व्यक्तिगत आजादी, और विचार व्यक्त करने का अधिकार सिर्फ वोटर लिस्ट पर निर्भर नहीं करते। चाहे किसी का नाम वोटर लिस्ट में हो या न हो, ये अधिकार सभी नागरिकों के पास मौजूद हैं। इसीलिए, SIR में नाम कटने से यह अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।

मतदान का अधिकार

यह एकमात्र अधिकार है, जिसका सीधा असर SIR प्रक्रिया के दौरान नाम कटने से पड़ता है। जब तक किसी व्यक्ति की अपील पर निर्णय नहीं आता, तब तक वह मतदान नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकार को स्वीकार किया है, लेकिन किसी की नागरिकता पर इस स्थिति का कोई असर नहीं है।

संपत्ति खरीदने का अधिकार

यदि किसी का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है, तो भी वह भूमि या संपत्ति खरीदने का अधिकार रखता है। यह अधिकार नागरिकता से जुड़ा है, जबकि वोटर लिस्ट से नहीं। जब तक गृह मंत्रालय किसी को गैर-नागरिक नहीं घोषित करता, तब तक लोग अपनी संपत्ति खरीद सकते हैं।

पासपोर्ट और विदेश यात्रा के अधिकार

SIR प्रक्रिया के बाद कई नागरिकों ने यह शिकायत की है कि उनका पासपोर्ट नवीकरण नहीं हो रहा। लेकिन यह सच है कि पासपोर्ट केवल अन्य दस्तावेजों के आधार पर जारी होता है, न कि वोटर लिस्ट के आधार पर। अतः, नाम कटने से पासपोर्ट या विदेश यात्रा के अधिकार पर कोई रोक नहीं लगेगी।

सरकारी योजनाओं का अधिकार

नागरिकता से जुड़े होने के कारण, राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का अधिकार भी सुनिश्चित रहता है। भले ही नाम SIR में कट गया हो, लेकिन लोग योजनाओं के लाभ के लिए योग्य रहेंगे। हालांकि, कुछ स्थानों पर इस संबंध में समस्याएं भी सामने आई हैं, जैसे पश्चिम बंगाल में राशन कार्ड का रद्द होना। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

आगे की स्थिति

ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है, और अभी भी 34 लाख लंबित अपीलें हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से बताया है कि नागरिकता का अधिकार और वोट देने का अधिकार अलग हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर उन अधिकारों की सही से रक्षा करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। आगे चलकर यह मुद्दा और भी बढ़ सकता है।

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