न्यूयॉर्क में UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान का शुभारंभ

The CSR Journal Magazine

भारत ने शुरू किया UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए दावेदारी का अभियान

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वर्ष 2028-29 के कार्यकाल की अस्थायी सदस्यता के लिए आधिकारिक तौर पर अपना कूटनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर 13 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ करेंगे।

जयशंकर न्यूयॉर्क में करेंगे अभियान की शुरुआत

भारत ने 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए औपचारिक अभियान शुरू किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘#India4UNSC 2028-29: Peace, Planet, Progress’ अभियान लॉंच करेंगे। इस अवसर पर वे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात करेंगे। यह पहल भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने का प्रयास है।

ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत

भारत उस समय यह अभियान चला रहा है जब विश्व रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। नई दिल्ली का लक्ष्य विश्व मंच पर विकासशील देशों यानी Global South की आवाज को सशक्त करना है। भारत चाहता है कि उसे उन चुनौतियों में शामिल किया जाए, जिनका समाधान वैश्विक स्तर पर होना आवश्यक है।

ताजिकिस्तान से होगी टक्कर

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2027 में होने वाले चुनाव में भारत एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट के लिए ताजिकिस्तान से मुकाबला करेगा। अगर भारत चुनाव जीतने में सफल होता है, तो यह 2028-29 के कार्यकाल में नौवीं बार UNSC का गैर-स्थायी सदस्य बनेगा। भारत ने पहले भी कई मौकों पर इस पद का लाभ उठाया है।

भारत को मिले थे 187 वोट 2010 में

भारत पहले भी 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 में सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य रह चुका है। 2010 में हुए चुनाव में भारत को 192 में से 187 वोट मिले थे, जो किसी भी उम्मीदवार के लिए एक उल्लेखनीय समर्थन था।

विस्तार की मांग करेगा भारत

भारत की यह मुहिम केवल दो साल की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए नहीं है। इसके जरिए नई दिल्ली UNSC में व्यापक सुधार की मांग को भी ताजा धार देगी। भारत का मानना है कि 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद आज की विश्व स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाती। इसलिए, स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने की UNSC में सुधार की मांग

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद में भी UNSC में सुधार की आवश्यकता जताई थी। उन्होंने कहा था कि विश्व तेजी से बदल रहा है और विकासशील देशों को इस प्रक्रिया में समान भागीदारी मिलनी चाहिए। उनका स्पष्ट बयान था कि UNSC में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता।

यूक्रेन संकट और मध्य-पूर्व के संघर्ष

यह अभियान ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन संकट और मध्य-पूर्व के संघर्षों के कारण दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही है। भारत पहले भी आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है, और आखिरी बार उसका कार्यकाल वर्ष 2021-22 में था। इसके साथ ही भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के ढांचे में व्यापक सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग भी उठाता रहा है।

भारत की रणनीति में और मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह अभियान केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की रणनीति है। एक ओर जहां भारत UNSC में 2028-29 के लिए गैर-स्थायी सदस्यता प्राप्त करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र में सुधार के अपने एजेंडे को भी वैश्विक स्तर पर समर्थन दिलाने का प्रयास कर रहा है।

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