बीसलपुर डेम में पर्याप्त जल भंडारण के बावजूद जयपुर में जल संकट

The CSR Journal Magazine
जयपुर में पानी की कमी नहीं है, लेकिन खराब होती जलापूर्ति व्यवस्था और वर्षों पुरानी पाइपलाइन ने शहर की प्यास बढ़ा दी है। बीसलपुर डेम में पर्याप्त जल भंडारण होने के बावजूद राजधानी के कई इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। 17 साल पुरानी पाइपलाइन में लगातार बढ़ रहे लीकेज, बार-बार होने वाले शटडाउन और नई लाइन परियोजना में देरी के कारण लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पानी उपलब्ध होने के बावजूद शहर के कई हिस्से आज भी टैंकरों पर निर्भर हैं।

बीसलपुर में पानी लबालब, फिर भी जयपुर प्यासा जर्जर पाइपलाइन और लीकेज ने बढ़ाई मुश्किलें

बीसलपुर डेम में पर्याप्त जल भंडारण होने के बावजूद जयपुर शहर के कई हिस्से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह पानी की कमी नहीं, बल्कि पुरानी हो चुकी पाइपलाइन, लगातार बढ़ती आबादी और समय पर नई जलापूर्ति परियोजना का पूरा नहीं होना है। 17 साल पुरानी बीसलपुर लाइन में 33 लीकेज सामने आ चुके हैं, जिनकी मरम्मत के लिए बार-बार शटडाउन लेना पड़ रहा है। इससे लाखों लोगों को 24 से 72 घंटे तक पानी नहीं मिल पाता और शहर में टैंकरों पर निर्भरता फिर बढ़ने लगी है।

17 साल पुरानी लाइन पर बढ़ा आबादी का बोझ

जयपुर को बीसलपुर परियोजना से वर्ष 2009 में पेयजल आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय यह व्यवस्था वर्ष 2021 तक की आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। लेकिन अब वर्ष 2026 में शहर की आबादी और पानी की मांग काफी बढ़ चुकी है। इसके बावजूद नई पाइपलाइन परियोजना समय पर शुरू नहीं हो सकी। नतीजतन पुरानी लाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और जल वितरण व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मांग के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विस्तार नहीं होने से संकट और गहरा गया है।

पानी का दबाव बढ़ते ही सामने आ रहे 33 लीकेज

बीसलपुर से जयपुर तक पानी पहुंचाने वाली 2300 एमएम व्यास की पाइपलाइन अब 17 साल पुरानी हो चुकी है। इस लाइन में वर्तमान में 33 स्थानों पर लीकेज दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार जैसे ही शहर की बढ़ती मांग को देखते हुए पानी का दबाव बढ़ाया जाता है, नई-नई जगहों पर रिसाव शुरू हो जाता है। लीकेज की मरम्मत के लिए बार-बार शटडाउन लेना पड़ता है, जिससे शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति बाधित हो जाती है। कई बार लोगों को दो से तीन दिन तक पानी का इंतजार करना पड़ता है, जिससे आमजन की परेशानी बढ़ रही है।

205 करोड़ की परियोजना भी नहीं दे सकी राहत

जलदाय विभाग ने व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सूरजपुरा में 205 करोड़ रुपए की लागत से 216 एमएलडी क्षमता का फिल्टर प्लांट और रेनवाल में इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन तैयार किया था। दावा किया गया था कि इससे मौजूदा पाइपलाइन से अधिक पानी लिया जा सकेगा और लाइन पर दबाव भी कम होगा। हालांकि जमीनी स्तर पर यह योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। बढ़ती मांग और पुरानी पाइपलाइन की कमजोर स्थिति के कारण फिल्टर प्लांट और पंपिंग स्टेशन का लाभ सीमित रह गया है। इससे करोड़ों रुपए के निवेश की उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

टैंकरों पर बढ़ी निर्भरता, नई लाइन का इंतजार

बीसलपुर जलापूर्ति शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि जयपुर में सरकारी टैंकरों की जरूरत लगभग समाप्त हो जाएगी। लेकिन मौजूदा हालात इसके विपरीत हैं। शहर के कई क्षेत्रों में आज भी टैंकरों के जरिए पेयजल वितरण किया जा रहा है और कुछ इलाकों में यही मुख्य जल स्रोत बन गया है। टैंकर वितरण व्यवस्था में खामियों के कारण जरूरतमंद लोगों को समय पर पानी नहीं मिल पाता। वहीं नई पाइपलाइन परियोजना की लागत 1100 करोड़ रुपए से बढ़कर करीब 1800 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। जब तक नई लाइन तैयार नहीं होती, तब तक जयपुरवासियों को पानी की उपलब्धता के बावजूद आपूर्ति संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos