लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-चीन ट्रेड फिर शुरू, केंद्र सरकार की मंजूरी से बढ़ी गर्मी
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच बॉर्डर ट्रेड छह साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेड सेशन आमतौर पर जून से सितंबर तक चलता है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आशीष भटगाई ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी होने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
लंबे इंतजार के बाद मिल रहा नया मौका
लिपुलेख दर्रे के जरिए तिब्बत के साथ बॉर्डर ट्रेड लंबे अंतराल के बाद 1992 में फिर से शुरू हुआ था। हालांकि, 2019 में COVID-19 महामारी के कारण इसे बंद कर दिया गया था। अब जब यह ट्रेड फिर से शुरू हो रहा है, तो इससे स्थानीय व्यापारियों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
सरकार की तरफ से तैयारियां तेज
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को लेटर लिखकर हिमालयी दर्रे के जरिए व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया है। लेटर में बताया गया है कि गृह मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से भी मंजूरी मिल चुकी है। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि संबंधित विभाग 2026 के ट्रेड सत्र के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।
व्यापारियों के लिए बेहतर व्यवस्था का आश्वासन
भारत और चीन के स्थानीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए संपर्क विवरण साझा किए जाएंगे। प्रशासन ने ट्रेड पास जारी करने, करेंसी एक्सचेंज के लिए बैंकों की व्यवस्था, कस्टम विभाग की तैनाती और धारचूला प्रशासन को विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें व्यापारियों के लिए ट्रांजिट कैंप, संचार, बैंकिंग, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं शामिल होंगी।
व्यापारियों ने की खुशी जाहिर
व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया है। पिथौरागढ़ सीमांत व्यापार संगठन के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकाली ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे व्यापारियों को 2019 से तकलाकोट (तिब्बत) के वेयरहाउस में रखे सामान को वापस लाने का अवसर मिलेगा। यह निर्णय न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
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