Uttarakhand के लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार टला, 100 व्यापारी इंतजार में

The CSR Journal Magazine
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से शुरू होने जा रहे परंपरागत भारत-चीन व्यापार की शुरुआत एक बार फिर टल गई है। पहले 8 जुलाई को निर्धारित व्यापार यात्रा के लिए भारतीय व्यापारियों को तकलाकोट पहुंचना था, लेकिन मंडी और दुकानों की तैयारियों में देरी के कारण यह कार्यक्रम स्थगित हो गया है। इस समय लगभग 100 भारतीय व्यापारी गुंजी और नाबीढांग में रुके हुए हैं। चीन की ओर से नई तिथि अभी भी स्पष्ट नहीं की गई है। व्यापारियों को तकलाकोट मंडी की व्यवस्था पूरी होने का इंतजार है।

नई व्यापारिक इमारत का निर्माण

चीनी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए नई दुकानों और गोदामों का निर्माण अभी चल रहा है। इस बार उन्हें एक नया व्यापारिक भवन प्रदान किया जाएगा, जहां किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस भवन और गोदामों की पूरी तैयारी होने के बाद ही भारतीय व्यापारियों को व्यापार शुरू करने की अनुमति मिलेगी। इस वर्ष व्यापार के लिए 134 भारतीय व्यापारियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 100 को ट्रेड पास जारी किया जा चुका है।

सुविधाओं का इंतजार

पिथौरागढ़ के अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह के अनुसार, भारतीय प्रशासन ने व्यापार शुरू कराने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुंजी में कस्टम कार्यालय में सामान की जांच और कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया चल रही है। कई व्यापारियों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। व्यापारियों की सुविधा के लिए गुंजी में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा भी संचालित की जा रही है।

नवीनतम कारोबारी अवसर

इस वर्ष सीमा व्यापार में युवाओं की भागीदारी बढ़ती नजर आ रही है। कई नए व्यापारी, जैसे सुनील गर्ब्याल और एक महिला व्यापारी, व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा बन रहे हैं। हालांकि, भारत-तिब्बत ट्रेड पास सामान्य पासपोर्ट की तरह नहीं है। यह केवल सीमा व्यापार से जुड़े लोगों के लिए वैध होता है।

राहत की उम्मीद भरा नया अध्याय

2019 में इस मार्ग से तीन करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। अब, नवीनतम सड़क और सुविधाओं के चलते, व्यापार की मात्रा और बढ़ने की उम्मीद है। पिछले छह वर्षों से फंसे व्यापारियों का सामान अब वापस लाना या बेचना संभव होगा।

सदियों पुराना व्यापारिक संपर्क

लिपुलेख दर्रा सिर्फ व्यापार का रास्ता नहीं बल्कि भारत, नेपाल और तिब्बत के बीच सांस्कृतिक संपर्क का प्रमुख मार्ग रहा है। यहां तक कि भोटिया समुदाय ने इस व्यापार को जीवित रखा है, ज‍ो तिब्बती संस्कृति से प्रेरित हैं।

सीमा विवाद का असर

भारत-चीन व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी सीमा विवादों के कारण भी यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील बन जाता है। नेपाल ने भारत के नकशे पर आपत्ति जताई है, लेकिन भारतीय प्रशासन तैयार है।

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