भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी: जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा को पछाड़ा

The CSR Journal Magazine
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे अधिक डिजिटलाइज़्ड इकॉनोमी बन गया है। 2025 में यह आठवें स्थान पर था, लेकिन अब इसकी स्थिति में सुधार हुआ है। इस उछाल का मुख्य कारण डिजिटल कनेक्टिविटी में बढ़ोतरी, फिनटेक विकास और नवाचार क्षमता में सुधार है। यह अध्ययन 71 देशों पर किया गया, जो दुनिया की जीडीपी के 96% को कवर करते हैं।

एआई में चौथा स्थान: एक बड़ी उपलब्धि

भारत एआई प्रदर्शन के मामले में भी अव्वल है। चिप्स-एआई इंडेक्स में भारत का स्थान अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे नंबर पर है। यह स्थिति बताती है कि भारत ने अपनी तकनीकी क्षमता को कैसे विकसित किया है। भारत ने डिजिटल माध्यमों से लगभग 31 लाख करोड़ रुपये का ट्रेड किया है, जो कि एक बड़ा आंकड़ा है।

AI यूज़र्स का योगदान

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 72% एआई उपयोगकर्ता विकासशील देशों में हैं, जिसके अंतर्गत भारत भी आता है। भारत और चीन मिलकर वैश्विक एआई उपयोग का लगभग 40% हिस्सा रखते हैं। खास बात यह है कि भारत अकेले 26% एआई उपयोगकर्ताओं का स्थान रखता है, जो उसके डिजिटल इकोसिस्टम की मजबूती को दर्शाता है।

चुनौतियाँ और संभावनाएँ

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपने डिजिटल स्केल को बढ़ाने के लिए और अधिक निवेश, रिसर्च और स्टार्टअप के साथ सहयोग करना होगा। वर्तमान में, भारत में एआई उपयोग और प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक निजी एआई निवेश का केवल 1% हिस्सा ही भारत को मिलता है।

तकनीकी क्षमता का केंद्र

भारत में एडवांस चिप्स और कंप्यूटिंग क्षमता अभी कुछ ही देशों में केंद्रित हैं। यदि भारत को एआई के क्षेत्र में आगे बढ़ना है, तो उसे इन तकनीकों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता होगी। ऐसे में, नवाचार के लिए रिसर्च और स्टार्टअप में सहयोग को बढ़ाना बेहद जरूरी है।

नवाचार का नया दौर

इस बदलाव के चलते भारत के लिए अवसरों की नई राहें खुल सकती हैं। डिजिटल इकॉनोमी और एआई में प्रगति भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिला सकती है। यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत की तकनीकी यात्रा अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। ऐसे में, भारत को अपने संसाधनों और नवाचार क्षमताओं का सही उपयोग करना होगा।

AI की दिशा में नए विचार

एनवीडिया के सीईओ जेसन हुआंग का कहना है कि अब बच्चों को यह सीखना चाहिए कि कैसे सीखें, बजाय इसके कि उन्हें कौन-सा विषय पढ़ना चाहिए। यह सोच एआई के युग में भविष्य की शिक्षा को एक नई दिशा दे सकती है।

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