लखनऊ: नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी में पुलिस की लापरवाही पर कोर्ट की फटकार, पुलिस कमिश्नर को कोर्ट का बुलावा
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी के बढ़ते मामलों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाते हुए लखनऊ के पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर से स्पष्टीकरण मांगा है और डीसीपी (ईस्ट) दीक्षा शर्मा समेत संबंधित अधिकारियों को तलब किया है।
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर समेत थाना प्रभारियों को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाल ही में नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामलों पर लखनऊ पुलिस को सख्त फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इस विषय में पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है। बीते कुछ महीनों में लापता होने के मामलों की वृद्धि ने सख्त कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर किया है।
गायब लड़की का मामला
इस मामले का प्रारंभ एक 12 साल की बच्ची के पिता द्वारा दायर याचिका से हुआ। याचिका में उल्लेख किया गया है कि उनकी बेटी पिछले चार महीनों से लापता है, और पुलिस ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाने की वजह से परिवार में चिंताएँ बढ़ गई हैं। कोर्ट ने डीसीपी पूर्वी को तीन दिन के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट का अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश
कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है कि आगामी 10 जून 2026 को होने वाली सुनवाई में डीसीपी (ईस्ट), ईस्ट ज़ोन के सर्किल ऑफिसर (CO), संबंधित थाना प्रभारी (SHOs) और जांच अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हों। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी ने डीसीपी (ईस्ट) को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों पर तीन दिनों के भीतर एक व्यापक और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
चैंकाने वाले आंकड़े आए सामने
एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि ईस्ट ज़ोन के 9 थानों के अंतर्गत कुल 81 महिलाओं और बच्चियों के अपहरण या लापता होने के मामले दर्ज थे। इनमें से 66 को बरामद कर लिया गया है, लेकिन 15 नाबालिग लड़कियां अभी भी लापता हैं।
पूरे शहर का डेटा तलब
कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस कमिश्नर से लखनऊ के सभी थानों में दर्ज लापता लड़कियों का पूरा डेटा और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि ऐसे संवेदनशील मामलों की जांच के लिए सक्षम अधिकारियों को तैनात किया जाए और बिना किसी ढिलाई के मामलों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
गुमशुदगी का बढ़ता आंकड़ा
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के गुमशुदगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके कारण पुलिस की बढ़ती लापरवाही पर सवाल उठते हैं। जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
पुलिस की जरूरी जिम्मेदारी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारियों को सही से नहीं निभाती, तो अदालत को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता होगी। यह मामला केवल एक परिवार का नहीं है, बल्कि पूरे समाज का है, जहाँ बालिकाएँ सुरक्षित नहीं हैं।
अगली सुनवाई की तारीख
इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून को निर्धारित की गई है। सभी संबंधित अधिकारियों को यह आदेश दिया गया है कि वे अपनी जांच रिपोर्ट लेकर कोर्ट में पेश हों। गुमशुदगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता को कोर्ट ने बार-बार स्वीकार किया है।
परिवार की पीड़ा
लड़की के परिवार ने पुलिस की निष्क्रियता और जांच में देरी के चलते अदालत का दरवाजा खटखटाया। शिकायत के एक मामले में वे इस बात से बेहद नाराज हैं कि पुलिस ने अब तक किसी प्रकार की प्रगति नहीं दिखाई। यह सिर्फ एक गायब लड़की की कहानी नहीं, बल्कि हजारों ऐसे परिवारों की चिंता है जो अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
कोर्ट का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और कहा है कि ऐसी स्थितियों में पुलिस को पूरी तन्मयता से काम करना चाहिए। यह एक बुलंद आवाज है उन गुमशुदा लड़कियों के परिवारों के लिए जो न्याय की राह देख रहे हैं।
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