ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर लगाम से भारतीय बाजारों में लौटी रौनक, रुपया 19 पैसे संभला

The CSR Journal Magazine

अमेरिकी ट्रेजरी के दखल से ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर लगी लगाम, भारतीय बाजारों में लौटी रौनक

वैश्विक वित्तीय बाजारों में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर और मुद्रा बाजार के लिए राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (US Treasury) द्वारा बाजार में किए गए रणनीतिक हस्तक्षेप के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड (Global Bond Yield) में जारी बेतहाशा तेजी पर ब्रेक लग गया है। इस बड़े घटनाक्रम के चलते भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह से जारी गिरावट का सिलसिला पूरी तरह थम गया और बाजारों को एक नया जीवनदान मिला है। ट्रेजरी के इस कदम ने न केवल अंतरराष्ट्रीय ऋण बाजार को शांत किया है, बल्कि लगातार मजबूत हो रहे अमेरिकी डॉलर की आक्रामकता को भी कमजोर कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रुपये (INR) को तगड़ी मजबूती मिली है।

अमेरिकी ट्रेजरी के हस्तक्षेप के बाद जबरदस्त रिकवरी

20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में अमेरिकी ट्रेजरी के हस्तक्षेप के बाद जबरदस्त रिकवरी देखी गई, जिससे पिछले 7 दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला पूरी तरह थम गया।
मुख्य सूचकांकों के अंतिम आंकड़े (Closing Figures)
सूचकांक / परिसंपत्ति,  अंतिम स्तर (LTP),  शुद्ध बदलाव (अंक),  प्रतिशत बदलाव (%)
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex),  77,537.72,  +628.04,  +0.82%
निफ्टी 50 (NSE Nifty),  24,231.85,  +153.55,  +0.64%
अमेरिकी डॉलर/भारतीय रुपया (USD/INR),  95.56-0.19 (रुपया मजबूत),  -0.20%

 गिरावट के सिलसिले पर ब्रेक

निफ्टी 50 ने लगातार 7 सत्रों की गिरावट (11 महीनों की सबसे लंबी मंदी की अवधि) को समाप्त करते हुए शानदार वापसी की।
सेंसेक्स में भारी उछाल: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 628 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर दोबारा 77,500 के स्तर को पार कर बंद हुआ।
ट्रेजरी का एक्शन: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा अपने लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम को $2 बिलियन से बढ़ाकर $4 बिलियन करने के फैसले से वैश्विक बाजार संभल गए।
रुपये को मजबूती: डॉलर इंडेक्स में नरमी के कारण रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे मजबूत होकर 95.56 के स्तर पर बंद हुआ।

बॉन्ड मार्केट में क्या हुआ और क्यों पड़ा असर?

पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रही थी। जब भी अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) जैसे भारत से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में लगाने लगते हैं। इसी वजह से भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में लगातार बिकवाली देखी जा रही थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी ने वित्तीय प्रणाली में तरलता (Liquidity) को संतुलित करने और बॉन्ड की मांग-आपूर्ति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से हस्तक्षेप किया। इस दखल के बाद बॉन्ड की कीमतों में सुधार हुआ और उनकी यील्ड (ब्याज दर) नीचे आ गई। यील्ड घटने से वैश्विक इक्विटी बाजारों ने राहत की सांस ली।

भारतीय शेयर बाजार को मिला नया बल

घरेलू शेयर बाजार पिछले पूरे सप्ताह बिकवाली के दबाव में टूट रहा था। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार निकासी से बाजार सहमे हुए थे। लेकिन जैसे ही अमेरिकी ट्रेजरी के हस्तक्षेप की खबर आई, भारतीय बाजारों का सेंटिमेंट पूरी तरह बदल गया।
शॉर्ट कवरिंग और नई खरीदारी: IT, बैंकिंग और ऑटो जैसे हैवीवेट सेक्टर्स में निचले स्तरों पर आक्रामक खरीदारी दर्ज की गई।
बिकवाली पर रोक: बॉन्ड यील्ड गिरने से विदेशी निवेशकों (FIIs) की ओर से होने वाली चौतरफा बिकवाली थम गई, जिससे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) को बाजार को ऊपर ले जाने का मौका मिल गया।
बाजार में स्थिरता: विश्लेषकों का मानना है कि इस हस्तक्षेप से बाजार को अस्थायी तौर पर एक मजबूत निचला स्तर (Bottom) मिल गया है, जिससे आने वाले दिनों में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।

डॉलर इंडेक्स में गिरावट, भारतीय रुपया हुआ मजबूत

अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम का सीधा और सबसे बड़ा असर विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) पर देखने को मिला।
कमजोर हुआ डॉलर: बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, ऊपरी स्तरों से नीचे आ गया।
रुपये को मिली संजीवनी: डॉलर के कमजोर होते ही भारतीय रुपये में जोरदार उछाल देखा गया। पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तरों के पास मंडरा रहा रुपया अब रिकवरी की राह पर है।
आयातकों को राहत: रुपये की इस मजबूती से भारत के आयात बिल, विशेषकर कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात की लागत में कमी आएगी, जो सीधे तौर पर देश के चालू खाता घाटे (CAD) और घरेलू मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने में मदद करेगी।

आगे के लिए क्या हैं संकेत?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी का यह हस्तक्षेप वैश्विक अर्थव्यवस्था को किसी बड़े संकट से बचाने के लिए उठाया गया कदम है। हालांकि, भारतीय बाजारों के लिए यह एक बड़ा बूस्टर साबित हुआ है, लेकिन निवेशकों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर रुख और वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालात पर बाजार की पैनी नजर रहेगी। फिलहाल के लिए, अमेरिकी दखल ने भारतीय निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक बड़ी राहत दे दी है।

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