भारत बना Apple का बड़ा iPhone एक्सपोर्ट हब, पांच महीने में 13.2 अरब डॉलर के फोन विदेश भेजे; स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में 82% हिस्सेदारी
अमेरिकी टेक कंपनी Apple के लिए भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि तेजी से महत्वपूर्ण विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनता जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत से 13.2 अरब डॉलर मूल्य के iPhone का निर्यात किया गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में यह करीब 47 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोतरी ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्यात में Apple की भूमिका को और मजबूत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त की अवधि में भारत से कुल स्मार्टफोन निर्यात करीब 36 प्रतिशत बढ़कर 15.96 अरब डॉलर पहुंच गया। इसमें अकेले iPhone का हिस्सा करीब 82 प्रतिशत रहा। इतना ही नहीं, स्मार्टफोन निर्यात में हुई अतिरिक्त वृद्धि का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा iPhone निर्यात से आया। यानी इस अवधि में भारत के स्मार्टफोन निर्यात में जो नई तेजी देखने को मिली, उसमें Apple की भूमिका सबसे बड़ी रही।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी तेज उछाल
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी इस दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का निर्यात बढ़कर 26.66 अरब डॉलर पहुंच गया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल वस्तु निर्यात भी अप्रैल-अगस्त 2026-27 में 215.91 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 183.21 अरब डॉलर की तुलना में 17.85 प्रतिशत अधिक है। अगस्त में इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का निर्यात अकेले 5.55 अरब डॉलर रहा, जो अगस्त 2025 के 2.93 अरब डॉलर से करीब 90 प्रतिशत अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त के दौरान 13.2 अरब डॉलर के iPhone निर्यात का मूल्य देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का करीब आधा बैठता है। इससे पता चलता है कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की मौजूदा वृद्धि में मोबाइल फोन और खासतौर पर iPhone का कितना बड़ा योगदान है। स्मार्टफोन अब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण उत्पादों में शामिल हो चुका है।
स्मार्टफोन बना भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में सबसे आगे
भारत के निर्यात ढांचे में स्मार्टफोन की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है। सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी एकल निर्यात श्रेणी बनकर उभरा था और इसने डीजल तथा कटे हुए हीरों जैसे पारंपरिक प्रमुख निर्यात उत्पादों को पीछे छोड़ा। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से स्मार्टफोन का निर्यात करीब 29.36 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह लगभग 5.5 अरब डॉलर था। यानी कुछ ही वर्षों में भारत से स्मार्टफोन के विदेशी बाजारों में भेजे जाने की मात्रा में कई गुना वृद्धि हुई है। अप्रैल-अगस्त 2026 की ताजा तस्वीर इस बदलाव को और स्पष्ट करती है। पांच महीने में स्मार्टफोन का निर्यात 15.96 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। एक सरकारी अधिकारी के हवाले से इस अवधि में स्मार्टफोन का निर्यात ऑटोमोटिव डीजल के निर्यात से करीब 21 प्रतिशत अधिक रहा।
Apple के साथ Samsung और Dixon का भी योगदान
भारत से स्मार्टफोन निर्यात की पूरी कहानी केवल Apple तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार Samsung और Dixon Technologies, जो Motorola जैसे ब्रांडों के लिए भी विनिर्माण करती है, ने भी स्मार्टफोन निर्यात में योगदान दिया है। इसके अलावा कुछ तीसरे पक्ष के माध्यम से हुए निर्यात भी कुल आंकड़े में शामिल हैं। हालांकि, कुल स्मार्टफोन निर्यात में Apple का हिस्सा इतना बड़ा है कि पूरे क्षेत्र की वृद्धि पर उसका सीधा असर दिखाई देता है। अप्रैल से अगस्त के बीच 15.96 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात में 13.2 अरब डॉलर का iPhone निर्यात होना इस बात को दर्शाता है कि भारत के स्मार्टफोन निर्यात ढांचे में Apple की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।
नई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना से उम्मीदें
Apple के भारत से बढ़ते निर्यात के पीछे सरकारी नीतियों और प्रोत्साहनों को भी महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक अप्रैल 2026 से लागू हुई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना से भारत में मोबाइल उत्पादन और निर्यात को और गति मिली है। यह योजना पहले की बड़े पैमाने की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना के बाद लाई गई है। केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी दी थी। इसके लिए पांच वर्षों में 62,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी। इसके तहत पात्र बिक्री पर अलग-अलग दरों से 2.25 से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन का प्रावधान है। घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण कलपुर्जों और उप-इकाइयों की खरीद से जुड़े अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य केवल भारत में मोबाइल फोन जोड़ने या तैयार करने तक सीमित नहीं है। योजना के जरिए घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, महत्वपूर्ण कलपुर्जों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने योजना की पूरी अवधि में करीब 39 लाख करोड़ रुपये के संचयी मोबाइल फोन उत्पादन और लगभग 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान जताया है।
PLI योजना ने तैयार की जमीन
भारत में Apple के बढ़ते विनिर्माण और निर्यात के लिए पहले लागू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी PLI योजना को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए लागू यह योजना मार्च 2026 में समाप्त हुई। सरकार के अनुसार इस योजना ने मोबाइल फोन विनिर्माण के लिए भारत में उत्पादन, निवेश और निर्यात का आधार तैयार किया। वित्त वर्ष 2021 से 2026 के दौरान Apple और उसके विनिर्माण भागीदारों ने PLI व्यवस्था के तहत उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय विस्तार किया। अप्रैल 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक Apple और उसके विनिर्माण भागीदारों ने योजना के तहत तय उत्पादन, निर्यात और रोजगार लक्ष्यों को पार किया था। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का iPhone निर्यात करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इससे Apple का iPhone भारत के सबसे बड़े ब्रांडेड निर्यात उत्पादों में शामिल हो गया।
अमेरिका बना प्रमुख बाजार
भारत में बने iPhone के लिए अमेरिका सबसे महत्वपूर्ण विदेशी बाजारों में से एक बना हुआ है। इससे पहले अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत के स्मार्टफोन निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत बताई गई थी और अमेरिका को भेजे गए स्मार्टफोन का मूल्य करीब 9.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। अप्रैल 2026 में भी भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में Apple की बड़ी भूमिका रही। उस महीने भारत से अमेरिका को 2.43 अरब डॉलर से अधिक के स्मार्टफोन निर्यात हुए, जो पिछले साल अप्रैल की तुलना में 47 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि थी। इसका अर्थ यह है कि भारत में बनने वाले iPhone केवल घरेलू बाजार की मांग पूरी करने के लिए नहीं हैं। यहां निर्मित उपकरणों का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों, खासकर अमेरिका, को भेजा जा रहा है। इससे भारत वैश्विक Apple आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Apple का बढ़ता निर्यात?
Apple के भारत से बढ़ते निर्यात का असर केवल निर्यात आंकड़ों तक सीमित नहीं है। बड़े पैमाने पर उत्पादन से मोबाइल फोन के साथ-साथ पैकेजिंग, परीक्षण, लॉजिस्टिक्स, कलपुर्जा आपूर्ति, औद्योगिक सेवाओं और अन्य सहायक गतिविधियों के लिए भी कारोबारी अवसर बढ़ते हैं। सरकार के अनुसार भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र पिछले 12 वर्षों में सात गुना से अधिक बढ़कर 13 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। मोबाइल विनिर्माण इस विस्तार का प्रमुख आधार रहा है। सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र करीब 25 लाख रोजगारों को समर्थन देता है और मोबाइल विनिर्माण में करीब 12 लाख लोग काम करते हैं। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ी चुनौती घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने की है। केवल तैयार मोबाइल को भारत में जोड़कर विदेश भेजने की बजाय यदि ज्यादा कलपुर्जे, उप-इकाइयां और तकनीकी सामग्री देश में तैयार होती है तो निर्यात से भारत के भीतर पैदा होने वाला आर्थिक मूल्य और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं। इसी वजह से नई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना में घरेलू स्रोतों से कलपुर्जों की खरीद को भी प्रोत्साहन से जोड़ा गया है।
भारत में Apple का विनिर्माण नेटवर्क लगातार बढ़ा
भारत में Apple के iPhone का विनिर्माण उसके अनुबंधित विनिर्माण भागीदारों के माध्यम से होता है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने भारत में उत्पादन बढ़ाया है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति के तहत भारत की भूमिका बढ़ी है। अब अप्रैल-अगस्त 2026 के केवल पांच महीनों में 13.2 अरब डॉलर के iPhone निर्यात का आंकड़ा सामने आने से यह स्पष्ट है कि भारत में Apple का विनिर्माण आधार पहले की तुलना में कहीं अधिक बड़ा हो चुका है। पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 47 प्रतिशत की वृद्धि यह भी संकेत देती है कि कंपनी भारत से विदेशी बाजारों के लिए उत्पादन लगातार बढ़ा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बदलाव की तस्वीर
कुल मिलाकर, 13.2 अरब डॉलर का iPhone निर्यात भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में आए बदलाव की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। स्मार्टफोन अब भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल है और Apple इस बदलाव का सबसे बड़ा हिस्सा बनकर उभरा है। नई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना के तहत यदि घरेलू कलपुर्जा उत्पादन और मूल्यवर्धन भी तेजी से बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में भारत की भूमिका केवल मोबाइल फोन के असेंबली और निर्यात केंद्र के बजाय एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला केंद्र के रूप में और मजबूत हो सकती है।
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