गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार ‘गो मित्र’, गो संरक्षण से जुड़ेगी Gen Z

The CSR Journal Magazine
योगी सरकार अब गो संरक्षण अभियान को गांवों में नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। खासकर युवाओं और बच्चों को गोवंश संरक्षण, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर में करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे। इन गो मित्रों के जरिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य है कि गो संरक्षण केवल गोशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की भागीदारी से इसे एक व्यापक अभियान बनाया जाए।

पहले बनेंगे मास्टर ट्रेनर, फिर गांवों में होगी ट्रेनिंग

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक अभियान को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए पहले मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर आगे दूसरे लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस तरह गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को ‘गो मित्र’ बनाने में प्राथमिकता दी जाएगी। बच्चों और युवाओं को भी अभियान से जोड़कर उनके मन में गोवंश के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा।

7,500 से ज्यादा गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से अधिक गोवंश

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। प्रदेश में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित हैं। गोवंश के भरण-पोषण के लिए मिलने वाली सहायता राशि भी बढ़ाई गई है। प्रति गोवंश प्रतिदिन दी जाने वाली राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। वहीं अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी के जरिए निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। इसका मकसद निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय देने के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना भी है।

1.15 लाख पशुपालकों को मिले करीब 1.85 लाख गोवंश

सरकार आम लोगों को भी गो संरक्षण से जोड़ रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं। इससे गोवंश को परिवार स्तर पर संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का मौका मिला है। सरकार अब प्रदेश की बड़ी पशुधन क्षमता को ग्रामीण आय और रोजगार बढ़ाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है।

गोशालाओं से बनेंगे रोजगार और कमाई के नए साधन

योगी सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। गोबर और गोमूत्र से अलग-अलग उत्पाद तैयार करने को बढ़ावा दिया जा रहा है। गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश है। इससे महिलाओं को गांव में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

 हर जिले की गोशालाओं की क्षमता का होगा आकलन

गो सेवा आयोग अब प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने की पहल कर रहा है। इसका उद्देश्य हर जिले की स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से गो आधारित आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है। जिस जिले में बायोगैस की ज्यादा संभावना होगी, वहां इस दिशा में काम बढ़ाया जा सकता है। वहीं दूसरे जिलों में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

गो संरक्षण से ग्रामीण आत्मनिर्भरता तक

सरकार की योजना गो संरक्षण को सिर्फ पशु संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय इसे प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़ने की है। 10 हजार गो मित्रों की तैयारी से गांवों में जागरूकता बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर गो आधारित गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। नई पीढ़ी की भागीदारी इस अभियान को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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