अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने हाल ही में बिहार और झारखंड का दौरा कर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली परियोजनाओं की समीक्षा की। यह दौरा केवल परियोजनाओं का निरीक्षण नहीं था, बल्कि पूर्वी भारत में ऊर्जा, उद्योग और रोजगार के नए युग की मजबूत नींव रखने की रणनीतिक पहल भी मानी जा रही है। लंबे समय से औद्योगिक विकास से वंचित रहे ये क्षेत्र अब बड़े पैमाने पर निवेश के केंद्र बनते दिख रहे हैं।
गोड्डा में अंतरराष्ट्रीय महत्व की परियोजना
झारखंड के आदिवासी बहुल गोड्डा जिले में स्थित 1,600 मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ताप बिजली संयंत्र की परिचालन समीक्षा की गई। इस परियोजना पर 16,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। खास बात यह है कि यह संयंत्र दीर्घकालिक समझौते के तहत विशेष रूप से बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति करता है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अहमियत बढ़ जाती है। इस परियोजना से क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार, मजबूत रेल कनेक्टिविटी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिहार में 2,400 मेगावाट की मेगा परियोजना
बिहार के भागलपुर जिले के पास पीरपैंती क्षेत्र में प्रस्तावित 2,400 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल बिजली परियोजना की प्रगति का भी जायजा लिया गया। इस परियोजना में 27,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है और इसके अगले चार से पांच वर्षों में चालू होने की संभावना है।
इसका उद्देश्य राज्य में तेजी से बढ़ती औद्योगिक और शहरी बिजली मांग को पूरा करना है। देश की सबसे बड़ी निजी ताप बिजली उत्पादक कंपनी अदाणी पावर को बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड से 25 वर्षों की दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति के लिए एलओए भी मिल चुका है, जिससे परियोजना को संस्थागत मजबूती मिलती है।
ओडिशा में भी बड़े फैसले
इसी दिन ओडिशा सरकार ने 44,200 करोड़ रुपये की 10 बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी। इसमें अदाणी समूह की पंप भंडारण जलविद्युत परियोजना और सेमीकंडक्टर चिप यूनिट भी शामिल है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय मंजूरी बैठक में नयागढ़ जिले में अदाणी हाइड्रो एनर्जी ट्वेल्व लिमिटेड को 9,731 करोड़ रुपये के निवेश की स्वीकृति दी गई।
रोजगार, ऊर्जा और विकास की नई कहानी
इन सभी परियोजनाओं के जरिए अदाणी समूह न केवल बिजली उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि पूर्वी भारत को औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई दिशा भी दे रहा है। बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में यह निवेश आने वाले वर्षों में आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है।
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