दिल्ली में प्रदूषण से जंग तेज: IIT दिल्ली करेगा रियल-टाइम सोर्स स्टडी

The CSR Journal Magazine
दिल्ली सरकार ने एयर पॉल्यूशन से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। IIT दिल्ली की मदद से एक एडवांस्ड रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने की योजना बनाई गई है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि इस स्टडी को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके। इस उच्च स्तरीय बैठक में IIT दिल्ली के वैज्ञानिकों ने एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए एक साइंस-बेस्ड रोडमैप पेश किया।

रियल-टाइम डेटा की आवश्यकता

इस स्टडी का उद्देश्य पुराने डेटा के बजाय रियल-टाइम में एयर पॉल्यूशन के स्रोतों की पहचान करना है। उल्लेखनीय है कि पहले के प्रशासन के दौरान इस प्रस्ताव को लंबे समय तक लटकाया गया था। IITM पहले से PM2.5 पर काम कर रहा है और अब एक्शन प्लान में PM10 पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस दिशा में दिल्ली सरकार के एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट और DPCC के बीच बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है।

DPCC सुपर-साइट का रीबूट

स्टडी की खासियत में DPCC सुपर-साइट का पुनरारंभ करना शामिल है। इसे एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंट्स और मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट्स से जोड़कर एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा जो उच्च-रिजोल्यूशन डेटा उपलब्ध कराएगा। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि यह स्टडी समय पर निर्णय लेने और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का आकलन करने में मदद करेगी।

स्टडी की प्रमुख विशेषताएं

इस अध्ययन में रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट, मोबाइल वैन से हॉटस्पॉट मॉनिटरिंग, 24×7 सुपर-साइट ऑपरेशन और एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे तत्व शामिल होंगे। इसके अलावा, DPCC को लाइव डैशबोर्ड और रिपोर्टिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे डेटा Collection और एनालिसिस को अत्यधिक बेहतर बनाया जा सकेगा। यह सभी विशेषताएं मिलकर दिल्ली के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय डेटा बेस तैयार करेंगी।

पॉल्यूशन के स्रोतों की पहचान

इस पहल के जरिए अधिकारियों को पॉल्यूशन के स्रोतों की सटीक पहचान करने, पॉलिसी के असर का मूल्यांकन करने और भविष्य में रणनीति तय करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि दिल्ली की पॉल्यूशन के खिलाफ लड़ाई डेटा और जवाबदेही आधारित होनी चाहिए। यह स्टडी यह स्पष्ट करेगी कि प्रदूषण कहां से आ रहा है और कौन से कदम वास्तव में असर डाल रहे हैं।

प्रोजेक्ट का कवरेज

यह परियोजना अगले पांच वर्षों में सभी प्रमुख हॉटस्पॉट्स को कवर करेगी। प्रत्येक हॉटस्पॉट पर लगभग 30 दिनों का सीजनल सैंपलिंग किया जाएगा। यह स्टडी DPCC स्टाफ के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का भी हिस्सा है, जिसमें उपकरण संचालन, डेटा एनालिसिस और केमिकल कैरेक्टराइजेशन शामिल हैं। यह पहल पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए एक सशक्त कदम साबित होगी।

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