अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या गिरी, होटल की ऑक्यूपेंसी सिर्फ 25% बची

The CSR Journal Magazine
सुबह के समय रामपथ पर श्रद्धालुओं की भीड़ कम हो गई है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वार से रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालु आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अब पहले जैसी संख्या नहीं है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। चढ़ावा चोरी के आरोपों के कारण श्रद्धालुओं का आना कम हो गया है।

दुकानदारों की चिंता बढ़ी

रामपथ पर चंदन और माला बेचने वाले एक युवक का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या अब 25% ही रह गई है। वहीं, फल-माला बेचने वाले सूर्य प्रकाश की भी यही समस्या है। उनका कहना है कि पहले दिनभर में 1000 से 1500 रुपये की बिक्री होती थी, लेकिन अब मुश्किल से 500 रुपये की कमाई हो पा रही है। ई-रिक्शा चलाने वाले अजय भी कहते हैं कि अब किराया निकालना कठिन हो गया है।

होटल व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव

अयोध्या होटल एसोशिएशन के प्रवक्ता अरुण अग्रवाल के अनुसार, होटल्स की ऑक्यूपेंसी मात्र 25% रह गई है। पहले होटल में दिनभर में श्रद्धालुओं की भरपूर भीड़ होती थी, लेकिन अब हालात बदले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर धार्मिक पर्यटन की गति नहीं बढ़ी तो नए होटल में निवेश का लाभ भी नहीं मिलेगा।

संतों की प्रतिक्रियाएं

संतों में भी इस विषय पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ संतों ने नए ट्रस्ट बनाने की मांग की है, जबकि अन्य इसे आस्था तोड़ने की साजिश मानते हैं। सिद्धपीठ श्री हनुमत निवास के महंत ने इसे व्यवस्था की गलती बताया है। उन्होंने कहा कि विश्वास तोड़ने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।

राजनीतिक हलचल बढ़ी

इस पूरे विवाद का असर राजनीतिक क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। राम मंदिर भाजपा का एक बड़ा प्रतीक है, और इसके ट्रस्ट पर सवाल उठने से विपक्षी दलों को भाजपा को घेरने का अवसर मिल गया है। आगामी यूपी चुनावों में भाजपा को इस विवाद का समाधान करना होगा।

सरकार का एक्शन प्लान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में सख्त एक्शन का भरोसा दिया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चुनौती दी है कि वह अपने रुख स्पष्ट करें। जबकि सपा सांसद ने कहा है कि यह आस्था का मामला है और इसमें लीपापोती नहीं होने दी जाएगी।

समस्या का समाधान कैसे होगा?

इस स्थिति में स्थानीय दुकानदारों और श्रद्धालुओं के लिए हालात जल्द बेहतर होना जरूरी है। चढ़ावा चोरी के विवाद से बने संकट से बचे रहने के लिए संत और दुकानदारों के साथ प्रशासन को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। बताया जा रहा है कि सरकार का फोकस डैमेज कंट्रोल पर है, लेकिन क्या यह समस्या का असली समाधान हो पाएगा? यह देखने वाली बात होगी।

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