West Bengal Elections China Town: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) कोलकाता में चीनी समुदाय को खुश करने में लगी है। पार्टी ने इस समुदाय के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए मैंडरिन भाषा में संवाद शुरू किया है। दरअसल, 1960 के दशक में यहां चीनियों की संख्या 50 हजार थी, जबकि अब ये सिर्फ 3 से 4 हजार रह गए हैं। अपने मतदाताओं से जुड़ने के लिए TMC ने चाइनाटाउन के क्षेत्र में मैंडरिन में Graffiti भी बनवाया है।
West Bengal Elections China Town: चाइनाटाउन की ऐतिहासिक पहचान
टांगरा क्षेत्र जो कभी चमड़ा उद्योग का बड़ा केंद्र था, अब माउथ-वैटरिंग चाइनीज खाने के लिए जाना जाता है। कोलकाता में चीनी लोकों की बस्ती मध्य कोलकाता के तिरेटा बाजार में है। यहाँ पर भी करीब 3 से 4 हजार लोग रहते हैं। वे अब भी इस शहर को अपना घर मानते हैं। TMC के उम्मीदवार जावेद खान ने इस बात पर जोर दिया कि यह क्षेत्र असल में एक ‘मिनी-इंडिया’ है, जहाँ अनेक धर्म और जातियों के लोग एकत्रित हैं।
कब आए चीन के लोग कोलकाता?
चीनी समुदाय की जड़ें कोलकाता में 18वीं सदी के अंत से मिलती हैं। पहला चीनी बाशिंदा, टोंग आचू, 1778 में यहाँ आया था। आचू ने बज-बज के पास एक चीनी मिल स्थापित की थी। उस समय उन्हें 45 रुपये सालाना किराए पर 650 बीघा ज़मीन मिली थी। आज भी आचीपुर में आचू की कब्र और एक चीनी मंदिर मौजूद हैं।
मतदाता बनने का महत्व
चाइनीज एसोसिएशन के अनुसार, यह समुदाय अक्सर सरकार से मदद के लिए नहीं संपर्क करता, क्योंकि वे स्वतंत्र जीवन जीना पसंद करते हैं। फिर भी, युवा मतदाता होते जा रहे हैं। वे राजनीतिक मामलों में ज़्यादा जागरूक हैं और अक्सर साथ मिलकर वोट डालते हैं।
सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का प्रभाव
1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले इस समुदाय की आबादी 40,000 से भी अधिक थी। इस युद्ध के दौरान, कई चीनी नागरिकों को संदिग्धता के कारण हिरासत में लिया गया था, जिसके फलस्वरूप कई लोग अपने घरों से दूर हो गए। अब, कोलकाता के तीन विधानसभा क्षेत्रों की पिछले कुछ चुनावों की मतदाता सूची में कई चीनियों के नाम गायब हो गए हैं।
आबादी में गिरावट का क्रम
वक्त के साथ चीनी समुदाय की आबादी में भयंकर गिरावट आई है। 1960 में जहां ये 50 हजार थे, वहीं 2026 में ये केवल 3 से 4 हजार रह गए हैं। यह गिरावट उन्हें एक महत्वपूर्ण मतदान श्रेणी बनाती है, जिसके प्रति राजनीतिक दलों की नजर रहती है।
चुनावों में राजनीतिक भागीदारी
भले ही यह संख्या कम हो गई हो, लेकिन चीनी समुदाय का राजनीतिक दलों के लिए फंडिंग में महत्त्वपूर्ण योगदान रहता है। इसके अलावा, उनकी समस्याओं पर ध्यान देने के लिए राजनीतिक दल एक नया दृष्टिकोण अपना रहे हैं, जो उन्हें और इनका समर्थन करने वाले मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
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