UP: बच्चों में लर्निंग गैप खत्म करने का मेगा प्लान, पूरे राज्य में चलेगा 15 दिनों का कैच-अप शिक्षण अभियान
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों में सीखने की कमी को दूर करने के लिए ‘कैच-अप शिक्षण अभियान’ (Catch-Up Teaching Programme) की घोषणा की है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCFSE) के तहत शुरू हो रहा यह अभियान पूरी तरह गतिविधि-आधारित और छात्र-अनुकूल होगा।
शिक्षा में सुधार की नई पहल
लर्निंग गैप को खत्म करने के लिए योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश में जुलाई में 15 दिनों का कैच-अप शिक्षण अभियान शुरू होगा। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए है, जो किसी कारणवश अध्ययन के स्तर तक नहीं पहुँच पाए हैं। अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक, हर दिन 20 से 30 मिनट का कैच-अप शिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा।
अभियान की समय-सीमा और मुख्य योजना
यह मेगा प्लान दो चरणों में चलाया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे न छूटे। पूरे राज्य के परिषदीय विद्यालयों में 15 दिनों का विशेष पुनरावृत्ति (रिवीजन) शिक्षण अभियान चलेगा, जो बुनियादी भाषा और गणितीय कौशल पर केंद्रित होगा। इसके बाद छात्रों के लिए नियमित कक्षाओं के साथ प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त कैच-अप शिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा।
पढ़ाई का तरीका और रणनीतियां
पारंपरिक किताबों के बजाय बच्चों को आधुनिक और व्यावहारिक तरीकों से सिखाया जाएगा। साप्ताहिक फॉर्मेटिव असेसमेंट (मूल्यांकन) के आधार पर बच्चों की जरूरतों के अनुसार उनके अलग-अलग ग्रुप बनाए जाएंगे। नई अवधारणाओं (Concepts) को रटाने के बजाय उनके दैनिक जीवन और स्थानीय अनुभवों से जोड़कर आसान बनाया जाएगा। कक्षाओं में बिग बुक, वार्तालाप कार्ड, पोस्टर, कहानी की किताबें और मैथ किट (गणित किट) का भरपूर उपयोग होगा। बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ‘मैं करूं-हम करें-तुम करो’ की रणनीति अपनाई जाएगी। इसके साथ ही पीयर लर्निंग (साथियों से सीखना) और खेल-आधारित पद्धतियों का प्रयोग होगा।
निगरानी और माता-पिता की भागीदारी
कार्यक्रम शुरू होने से पहले ‘बेसलाइन’ और खत्म होने पर ‘एंडलाइन’ असेसमेंट के जरिए बच्चों की प्रगति का रिकॉर्ड रखा जाएगा। डायट (DIET) मेंटर, एआरपी (ARP) और खंड शिक्षा अधिकारी समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। मासिक शिक्षक-अभिभावक बैठकों (PTM) में इस पर चर्चा होगी ताकि बच्चों को घर पर भी पढ़ाई का बेहतर माहौल मिल सके।
बच्चों की जरूरतों पर फोकस
इस अभियान का लक्ष्य प्रत्येक विद्यार्थी को उनकी सीखने की आवश्यकता के अनुसार शैक्षणिक समर्थन प्रदान करना है। निपुण भारत मिशन के तहत पहले ही आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत किया गया है। अब सरकार का ध्यान उन बच्चों पर है, जो सीखने में पीछे रह गए हैं। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीएफएसई-2023 के अनुसार तैयार किया गया है।
शिक्षा सुधार का नया चरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधार अब नामांकन और आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ वास्तविक अधिगम परिणामों पर केंद्रित हो चुका है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल अनुश्रवण के माध्यम से कोई बच्चा पीछे न रहे। यह पहल गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
रुचिकर और अनुभव आधारित शिक्षण
कैच-अप शिक्षण को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं किया जाएगा। इसे स्थानीय परिवेश और दैनिक जीवन के अनुभवों से जोड़ा जाएगा। शिक्षण सामग्री, गणित किट और चार्ट्स का उपयोग किया जाएगा। खेल आधारित गतिविधियों और समूह कार्य के माध्यम से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ाई जाएगी।
आकलन और अभिभावक की भागीदारी
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विद्यार्थियों का बेसलाइन और एंडलाइन आकलन किया जाएगा। नियमित प्रगति की रिकॉर्डिंग की जाएगी। विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों को भी इस अभियान में जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों को स्कूल और घर, दोनों जगह सीखने का अनुकूल वातावरण मिलेगा। अपर मुख्य सचिव (बेसिक और माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) को इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।
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